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प्रश्न
पाठ में आए लोकभाषा के इस संवाद को समझकर इसे खड़ी बोली हिंदी में ढालकर प्रस्तुत कीजिए।
हम कुकुरी बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहिं त तुम्हार पचै की छाती पै होरहा भूँजब और राज करब, समुझे रहौ।
भाषांतर
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उत्तर
हम कुतिया-बिल्ली नहीं हैं। मेरा मन करेगा तो मैं दूसरे के घर जाऊँगी, अन्यथा तुम लोगों की छाती पर ही चने भुनूँगी और राज करुँगी, यह समझ लेना।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
