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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर अपने शब्दों में आलेख लिखें:
फ़िल्मों में हिंसा
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उत्तर
फ़िल्मों में हिंसा
फ़िल्में समाज का मनोरंजन करने के साथ-साथ लोगों की सोच और व्यवहार को भी प्रभावित करती हैं। आजकल अनेक फ़िल्मों में मार-धाड़, गोलीबारी, हत्या और अन्य हिंसक दृश्यों को प्रमुखता दी जाती है। कुछ फिल्मों में हिंसा कहानी की आवश्यकता होती है, लेकिन कई बार इसे केवल मनोरंजन और दर्शकों को आकर्षित करने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है।
फ़िल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा का बच्चों और किशोरों पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है। बार-बार हिंसक दृश्य देखने से उनमें हिंसा के प्रति संवेदनशीलता कम हो सकती है। कुछ बच्चे फिल्मी पात्रों की नकल करने का प्रयास भी कर सकते हैं। इसलिए फिल्मों में हिंसा को प्रस्तुत करते समय निर्माताओं को सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए।
हालाँकि हर हिंसक दृश्य को गलत नहीं कहा जा सकता। युद्ध, अपराध या सामाजिक संघर्ष पर आधारित फिल्मों में हिंसा कहानी का आवश्यक हिस्सा हो सकती है। ऐसी फिल्मों के माध्यम से समाज में अपराध, अन्याय और हिंसा के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता भी पैदा की जा सकती है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब हिंसा को बिना किसी उद्देश्य के आकर्षक या आदर्श रूप में दिखाया जाता है।
फ़िल्मों में हिंसा के प्रभाव को कम करने के लिए अभिभावकों को बच्चों के लिए फिल्मों का चयन सावधानी से करना चाहिए। दर्शकों को भी मनोरंजन और वास्तविक जीवन के बीच अंतर समझना चाहिए।
निष्कर्षतः फ़िल्मों में हिंसा का प्रयोग कहानी की आवश्यकता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलित होना चाहिए। मनोरंजन के साथ सकारात्मक संदेश देना ही सिनेमा की बेहतर भूमिका हो सकती है।
