हिंदी

निम्नलिखित वाक्य को पढ़ो और मोटे अक्षर में छपे शब्द पर ध्यान दो, पढ़कर उद्देश्य-विधेय अलग करके लिखो: हिलामय देश का गौरव है।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित वाक्य को पढ़ो और मोटे अक्षर में छपे शब्द पर ध्यान दो, पढ़कर उद्देश्य-विधेय अलग करके लिखो:

हिलामय देश का गौरव है।

एक पंक्ति में उत्तर
Advertisements

उत्तर

उद्देश्य → हिमालय

विधेय → देश का गौरव है

shaalaa.com
व्याकरण
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.07: जहाँ चाह, वहाँ राह - भाषा की ओर [पृष्ठ २१]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 1.07 जहाँ चाह, वहाँ राह
भाषा की ओर | Q (१) | पृष्ठ २१
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 7 जहाँ चाह, वहाँ राह
पाठ्य प्रश्न | Q १. (क) | पृष्ठ ५६

संबंधित प्रश्न

निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो 

व्यक्‍ति


वाक्‍य शुद्ध करके लिखो :

तुम्‍हारे दाने कहा है


पाठ में प्रयुक्‍त उद्‌धरण, सुवचन, मुहावरे, कहावतें, आलंकारिक शब्‍द आदि की सूची बनाकर अपने लेखन प्रयोग हेतु संकलन करो।


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

पैसों का अपव्यय नहीं करना चाहिए।


शब्‍द-युग्‍म पूरे करते हुए वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:

प्रचार


सहायक क्रिया का वाक्‍य में प्रयोग कीजिए।

करना


निम्नलिखित मुहावरे/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:

टोपी - पहनना - ______ - ______ 


दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ: 

 

__________________

__________________


अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो :

इसे हिमालय क्यों कहते हैं ?


नीचे दिए गए वाक्यों के रेखांकित अंश पर ध्यान देते हुए उन्हें पढ़िए-

(क) निर्बल ही धन की ओर झुकता है।

(ख) लोग संयमी भी होते हैं।

(ग) सभी कुछ तो लेने को जी होता था।

ऊपर दिए गए वाक्यों के रेखांकित अंश ‘ही’, ‘भी’, ‘तो’ निपात हैं जो अर्थ पर बल देने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। वाक्य में इनके होने-न-होने और स्थान क्रम बदल देने से वाक्य के अर्थ पर प्रभाव पड़ता है, जैसे-

मुझे भी किताब चाहिए। (मुझे महत्त्वपूर्ण है।)
मुझे किताब भी चाहिए। (किताब महत्त्वपूर्ण है।)

आप निपात (ही, भी, तो) का प्रयोग करते हुए तीन-तीन वाक्य बनाइए। साथ ही ऐसे दो वाक्यों का निर्माण कीजिए जिसमें ये तीनों निपात एक साथ आते हों।


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

पहले मैंने बगीचा देखा फिर मैं एक टीले पर चढ़ गया और वहाँ से उतरकर सीधा इधर चला आया


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

भक्तिकाल में दो धाराएँ थीं सगुण धारा, निर्गुण धारा


निम्न शब्द के तीन पर्यायवाची शब्‍द रिक्‍त स्‍थान में लिखिए:-

शब्द पर्यायवाची शब्द
  खेतिहर      

अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

वहाँ कोई लगभग एक दर्जन सेब रहे होंगे।


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

सूर्य अस्त हुआ आकाश लाल हुआ वराह पोखरों से उठकर घूमने लगे हिरन हरियाली पर सोने लगे और जंगल में धीरे धीरे अँधेरा फैलने लगा


शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह  शब्द  विलोम
+ उत्थान ×

शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह  शब्द  विलोम
+ अपमान ×

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
______ वाक् + जाल  

परिच्छेद पढ़िए और उसमें आए शब्‍दों के लिंग एवं वचन बदलकर लिखिए।

मैं गाँव से शहर पढ़ने आता था। गाँव का मेरा एक मित्र भी था। सावन-भादों की बादलों से ढँकी रात में बीहड़ पानी बरसता है। पूरा सन्नाटा शेर की दहाड़ सरीखा गरज उठता है। छमाक से बिजलियाँ कड़कती हैं। माँ बच्चे को अपने छाती से चिपकाती है। हाँड़ी में उबलते दाल-भात के साथ उसकी उम्‍मीद भी पकती है। उसका श्रम पकता है। अंत में कभी-कभी माँ हाँड़ी में चिपके मुट्ठी भर बचे चावल खाती है। न जाने कहाँ से अपनी आँखों में इतनी तेज चमक पैदा कर लेती है कि भरे पेटवाले की आँखें चौंधियाँ जाती हैं।

उसके त्‍याग और संतान की तृप्ति के पानी से उसकी साध लहलहाती है। बैलगाड़ी में बैठी संतान को छतरी की छाँव करती है।

बस में बच्चा खिड़की के पास बैठा बाहर दृश्यों को देखता है और वह पूरी यात्रा बच्चे को देखती रहती है। सँभालती रहती है। रेल जब बोगदे के भीतर से गुजरती है, तो अनायास उसका हाथ बच्चे की बाँह पर चला जाता है और पिता का सामान पर।


विज्ञापन पढ़िए और शब्‍द युग्‍म ढूँढ़कर लिखिए:

खुश खबर ! खुश खबर !! खुश खबर !!!
हस्‍तकला वस्‍तुओं की प्रदर्शनी

भारत के विविध राज्‍यों में हाथों से बनाई गई वस्‍तुओं की
भव्य प्रदर्शनी आपके शहर में !

कालावधि: २० अक्‍तूबर २०१७ से ३० अक्‍तूबर २०१७
समय: सुबह ११:०० से रात ९:०० तक
स्‍थान: गणेश कला क्रीड़ा मंदिर, पुणे

खरीदारी पर आकर्षक छूट !

साथ-ही-साथ विविध राज्‍यों के खाद्य व्यंजनों के ठेले

(स्‍टॉल्‍स्‌) (गाँव-शहर के छोटे-बड़े, बाल-वृद्‌ध, महिला-पुरुष सभी
घूमते-फिरते, हँसते-हँसते, खान-पान का स्‍वाद ले सकते हैं।)

प्रवेशः निःशुल्क


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×