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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए:
भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा?
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उत्तर
भक्तिन एक सरल, भोली-भाली तथा बुद्धिमान स्त्री थी, जो लेखिका के प्रति अत्यंत समर्पित और सेवाभावी थी। हालांकि उसके व्यक्तित्व में कुछ कमियाँ भी थीं। लेखिका द्वारा इधर-उधर रखे गए पैसों को वह उठाकर भंडारघर की मटकी में सुरक्षित रख देती थी और इसे चोरी नहीं, बल्कि संरक्षण का कार्य मानती थी। अपनी बात को सही सिद्ध करने के लिए वह अक्सर लेखिका से अनावश्यक तर्क-वितर्क करती थी। लेखिका के क्रोध से बचने के उद्देश्य से वह कई बार छोटी-छोटी बातों पर झूठ भी बोल देती थी। इसके अतिरिक्त, शास्त्रों में वर्णित बातों की वह अपनी सुविधा और समझ के अनुसार व्याख्या किया करती थी।
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- ऊ बिचारअउ तौ रात-दिन काम माँ जुकी रहती हैं, अउर तुम पचै घमती-फिरती हौ, चलौ तनिक हाथ बटाय लेउ।
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- तुम पचै का का बताईययहै पचास बरिस से संग रहित हैं।
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भक्तिन पाठ में पहली कन्या के दो संस्कर जैसे प्रयोग लेखिका के खास भाषाई संस्कार की पहचान कराता है, साथ ही ये प्रयोग कथ्य को संप्रेषणीय बनाने में भी मददगार हैं। वर्तमान हिंदी में भी कुछ अन्य प्रकार की शब्दावली समाहित हुई है। नीचे कुछ वाक्य दिए जा रहे हैं जिससे वक्ता की खास पसंद का पता चलता है। आप वाक्य पढ़कर बताएँ कि इमें किन तीन विशेष प्रकार की शब्दावली का प्रयोग हुआ है? इन शब्दावलियों या इनके अतिरिक्त अन्य किन्हीं विशेष शब्दावलियों का प्रयोग करते हुए आप भी कुछ वाक्य बनाएँ और कक्षा में चर्चा करें कि ऐसे प्रयोग भाषा की समृद्धि में कहाँ तक सहायक है?
- अरे! उससे सावधान रहना! वह नीचे से ऊपर तक वायरस से भरा हुआ है। जिस सिस्टम में जाता है उसे हैंग कर देता है।
- घबरा मत! मेरी इनस्वींगर के सामने उसके सारे वायरस घुटने टेकेंगे। अगर ज़्यादा फ़ाउल मारा तो रेड कार्ड दिखा के हमेशा के लिए पवेलियन भेज दूँगा।
- जानी टेंसन नई लेने का वो जिस स्कूल में पढ़ता है अपुन उसका हैडमास्टर है।
