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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-
इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?
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उत्तर
मैं लेखक द्वारा 'बड़े भाई साहब' पाठ में शिक्षा पर किए गए व्यंग्य से पूरी तरह सहमत हूँ, क्योंकि इस प्रकार की स्कूल प्रणाली बच्चों की व्यक्तिगत पहचान को नष्ट कर देती है और उन्हें स्वाभाविक रूप से विकसित होने से रोकती है।
पाठ में कहा गया है कि:
- शिक्षा-प्रणाली बच्चों के लिए व्यावहारिक शिक्षा को पूरी तरह से नजर अंदाज करती है।
- बच्चों के ज्ञान और कौशल को बेहतर बनाने के बजाय उन्हें रटने की प्रणाली के लिए प्रशिक्षित करने पर जोर दिया जाता है, जो बिल्कुल अनुचित है।
- परीक्षा प्रणाली में सांख्यिकी को महत्वपूर्ण माना जाता है। शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों के समग्र विकास पर कोई ध्यान नहीं देती है।
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए -
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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
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