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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए − बुनियाद ही पुख्ता न हो तो मकान कैसे पायेदार बने?

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प्रश्न

निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए 

बुनियाद ही पुख्ता न हो तो मकान कैसे पायेदार बने?

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उत्तर

बड़े भाई साहब का विचार था कि यदि मकान की नीव ही कमज़ोर हो तो उसपर मंजिले खड़ी नहीं हो सकती हैं। इसी प्रकार यदि जीवन को सुंदर दिशा देनी हो तो परिश्रम करना आवश्यक है। यहाँ नीव से तात्पर्य घर के बड़ों से है तथा मकान आने वाली पीढ़ी को कहा गया है।

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बड़े भाई साहब
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अध्याय 2.1: बड़े भाई साहब - लिखित (ग) [पृष्ठ ६४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
अध्याय 2.1 बड़े भाई साहब
लिखित (ग) | Q 3 | पृष्ठ ६४

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फेल होने पर भी भाई साहब किस आधार पर अपना बड़प्पन बनाए हुए थे?


भाई साहब ने अपने दरजे की पढ़ाई का जो चित्र खींचा था उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?


निम्नलिखित में से कौन-से वाक्य 'बड़े भाई साहब' कहानी से प्राप्त प्रेरणा को दर्शाते हैं -

  1. कथनी और करनी का अंतर हमारी स्थिति को हास्यास्पद बना सकता है।
  2. पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी छात्र जीवन के आवश्यक अंग हैं।
  3. केवल परीक्षा से पहले ध्यान लगाकर पढ़ लेने से प्रथम आ सकते हैं।
  4. बड़े भाई साहब ज्ञान की बातें लेखक को आसानी से समझा देते हैं।

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:

परिवार के अनुभवी जनों द्वारा दी गई सीख भविष्य निर्माण में सहायक सिद्ध होती है। आपके द्वारा स्पर्श पाठ्यपुस्तक में पढ़े गए पाठ के माध्यम से भी है यह ज्ञात होता है। कहानी के पात्रों के माध्यम से कथन को सिद्ध कीजिए।


गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -

‘बड़े भाई साहब’ कहानी का बड़ा भाई शिक्षा को ‘रटंत ज्ञान’ और ‘बे-सिर-पैर की बातें’ मानता है जिनका व्यावहारिक जीवन में कोई अर्थ नहीं, इस संदर्भ में आपके क्या विचार हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:

सालाना इम्तिहान हुआ। भाई साहब फ़ेल हो गए, मैं पास हो गया और दरजे में प्रथम आया। मेरे और उनके बीच में केवल दो साल का अंतर रह गया। जी में आया, भाई साहब को आड़े हाथों लूँ - “आपकी वह घोर तपस्या कहाँ गई ?' मुझे देखिए, मज़े से खेलता भी रहा और दरजे में अव्वल भी हूँ।' लेकिन वह इतने दुखी और उदास थे कि मुझे उनसे दिली हमदर्दी हुई और उनके घाव पर नमक छिड़कने का विचार ही लज्जास्पद जान पड़ा। हाँ, अब मुझे अपने ऊपर कुछ अभिमान हुआ और आत्मसम्मान भी बढ़ा । भाई साहब का वह रौब मुझ पर न रहा। आज़ादी से खेलकूद में शरीक होने लगा। दिल मज़बूत था। अगर उन्होंने फिर मेरी फ़जीहत की, तो साफ़ कह दूँगा - 'आपने अपना खून जलाकर कौन - सा तीर मार लिया। मैं तो खेलते - कूदते दरजे में अव्वल आ गया।' ज़बान से यह हेकड़ी जताने का साहस न होने पर भी मेरे रंग - ढंग से साफ़ ज़ाहिर होता था कि भाई साहब का वह आतंक मुझ पर नहीं था। भाई साहब ने इसे भाँप लिया - उनकी सहज बुद्ध बड़ी तीव्र थी और एक दिन जब मैं भोर का सारा समय गुल्ली - डंडे की भेंट करके ठीक भोजन के समय लौटा, तो भाई साहब ने मानो तलवार खींच ली।
  1. कक्षा में प्रथम आने पर छोटे भाई के व्यवहार में बड़े भाई साहब के प्रति झलकने लगा:   [1]
    1. प्रसन्नता
    2. अहंकार
    3. स्वाभिमान
    4. गर्व
  2. छोटा भाई बड़े भाई साहब को आड़े हाथों लेना चाहता था परंतु ऐसा कर नहीं पाया, क्यों?   [1]
    1. उनकी डाँट-डपट का डर था
    2. उसकी हिम्मत नहीं पड़ी
    3. लोक-लाज का डर था 
    4. उनसे हमदर्दी हो आई
  3. छोटे भाई के अव्वल आने पर भाई साहब के व्यवहार में क्या अंतर आया?   [1]
    1. वे और अधिक ध्यानपूर्वक पढ़ने लगे
    2. उनके रौब में थोड़ी नरमी आ गई
    3. वे भी खेल - कूद में भाग लेने लगे
    4. अपनी पीड़ा भूलकर बेहद प्रसन्न हो गए
  4. निम्नलिखित कथन तथा कारण को पढ़कर दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:   [1]

    कथन
    : भाई साहब गुस्सा हो गए और उन्होंने तलवार खींच ली।
    कारण: छोटा भाई सुबह से शाम तक गुल्ली-डंडा खेलकर लौटा था।

    विकल्प:

    1. कथन और कारण दोनों गलत हैं।
    2. कथन सही है लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है।
    3. कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।
    4. कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  5. कौन-सा/से वाक्य गद्यांश से मेल खाते हैं?   [1]

    1. वार्षिक परीक्षा में हर बार की तरह छोटा भाई भी अच्छे अंकों से पास हो गया।
    2. भाई साहब दुखी और उदास हो गए थे।
    3. छोटे भाई ने अपने हाव-भाव से दर्शा दिया कि उन दोनों में कोई बराबरी नहीं है।
    4. अब बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को कुछ भी कहना पूरी तरह से छोड़ दिया था।
      विकल्प:
      1.  I, II
      2. केवल III
      3. II, III
      4. III. IV

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