Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:
परिवार के अनुभवी जनों द्वारा दी गई सीख भविष्य निर्माण में सहायक सिद्ध होती है। आपके द्वारा स्पर्श पाठ्यपुस्तक में पढ़े गए पाठ के माध्यम से भी है यह ज्ञात होता है। कहानी के पात्रों के माध्यम से कथन को सिद्ध कीजिए।
Advertisements
उत्तर
कहानी "बड़े भाईसाहब" में पात्र "बड़े भाई" अपने अनुभवी जनों द्वारा दी गई सीख से प्रभावित होते हैं। उनके भाई के सलाह के बाद, उनका अभिभावकों और शिक्षकों के प्रति विश्वास बढ़ता है। उन्हें यह समझ में आता है कि समय और परिश्रम से सफलता मिलती है। इस प्रेरणादायक कहानी के माध्यम से हमें यह संदेश मिलता है कि आदर्श वयस्क और गुरु के मार्गदर्शन से हम भविष्य निर्माण कर सकते हैं।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए -
बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए -
छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-
इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए:
बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्वपूर्ण कहा है?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि −
भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
बुनियाद ही पुख्ता न हो तो मकान कैसे पायेदार बने?
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
आँखे आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।
शिक्षा जैसे महत्त्वपूण मसले पर बड़े भाई साहब के विचारों को स्पष्ट कीजिए।
अंग्रेजी विषय के बारे में भाई व लेखक को क्या बताते थे? ऐसा कहने के पीछे भाई साहब का उद्देश्य क्या था
‘मुझे देखकर भी सबक नहीं लेते’-ऐसा कहकर भाई साहब लेखक को क्या बताना चाहते थे?
लेखक अपने ही बनाए टाइम-टेबिल पर अमल क्यों नहीं कर पाता था?
बड़े भाई साहब ने लेखक का घमंड दूर करने के लिए क्या उपाय अपनाया?
फेल होने पर भी भाई साहब किस आधार पर अपना बड़प्पन बनाए हुए थे?
भाई साहब ने अपने दरजे की पढ़ाई का जो चित्र खींचा था उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
