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कहानी में जिंदगी से प्राप्त अनुभवों को किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्त्वपूर्ण बताया गया है। अपने माता-पिता बड़े भाई-बहिनों या अन्य बुजुर्ग/बड़े सदस्यों से उनके जीवन के बारे में बातचीत कीजिए और पता लगाइए

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प्रश्न

कहानी में जिंदगी से प्राप्त अनुभवों को किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्त्वपूर्ण बताया गया है। अपने माता-पिता बड़े भाई-बहिनों या अन्य बुजुर्ग/बड़े सदस्यों से उनके जीवन के बारे में बातचीत कीजिए और पता लगाइए कि बेहतर ढंग से जिंदगी जीने के लिए क्या काम आया-समझदारी/पुराने अनुभव या किताबी पढ़ाई?

कृति
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उत्तर

प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी 'बड़े भाई साहब' में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि केवल किताबी ज्ञान या डिग्रियाँ अर्जित कर लेना ही जीवन की सफलता नहीं है, बल्कि जीवन का व्यावहारिक अनुभव और समझदारी कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। इस संदर्भ में जब मैंने अपने दादाजी, माता-पिता एवं परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों से बातचीत की, तो उनके अनुभवों से निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण बातें सामने आईं:

1. संकटकालीन परिस्थितियों में अनुभव की भूमिका: परिवार के बुज़ुर्गों का मानना है कि जीवन में जब अचानक कोई विपत्ति, बीमारी या अप्रत्याशित संकट आता है, तब किताबी नियम या सैद्धांतिक ज्ञान तुरंत काम नहीं आते। ऐसे समय में व्यक्ति का धैर्य, जीवन के पुराने अनुभव और व्यावहारिक सूझ-बूझ ही सही निर्णय लेने में सहायता करते हैं।

2. कुशल वित्तीय एवं गृह प्रबंधन: पिताजी और माँ ने बताया कि उन्होंने अर्थशास्त्र की कोई उच्च डिग्री प्राप्त नहीं की, फिर भी वे सीमित आय में पूरे महीने का खर्च कुशलतापूर्वक चलाते हैं तथा भविष्य के लिए बचत भी करते हैं। ठीक वैसे ही जैसे पाठ में हेडमास्टर साहब की माता जी और लेखक के दादा जी अपने व्यावहारिक ज्ञान से घर का सुचारु संचालन करते थे।

3. सामाजिक संबंधों और मानवीय मूल्यों का निर्वाह: बड़ों के अनुसार समाज में मान-सम्मान, रिश्तों में सामंजस्य और दूसरों के सुख-दुख भागीदारी केवल किताबों को रटने से नहीं सीखी जा सकती। यह गुण परिवार के संस्कारों, समाज में उठने-बैठने और जीवन के थपेड़ों से प्राप्त व्यावहारिक अनुभव से आते हैं।

4. किताबी ज्ञान और व्यावहारिक समझदारी का संतुलन: बातचीत का सबसे अहम बिंदु यह रहा कि किताबी पढ़ाई हमें आजीविका और तकनीकी योग्यता देती है, परंतु उस योग्यता का जीवन में सही उपयोग कैसे किया जाए, यह हमें अनुभव व समझदारी ही सिखाती है। अनुभवहीन किताबी ज्ञान अक्सर अहंकार को जन्म देता है, जबकि अनुभव व्यक्ति को विनम्र और परिपक्व बनाता है।

निष्कर्ष: ज़िंदगी को सही अर्थों में सार्थक, संतुलित और सफल बनाने के लिए किताबी ज्ञान की अपेक्षा जीवन के वास्तविक अनुभव, संवेदनशीलता और व्यावहारिक समझदारी ही सर्वाधिक काम आती है।

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बड़े भाई साहब
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अध्याय 2.1: बड़े भाई साहब - परियोजना कार्य [पृष्ठ ५६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
अध्याय 2.1 बड़े भाई साहब
परियोजना कार्य | Q 1 | पृष्ठ ५६

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सालाना इम्तिहान हुआ। भाई साहब फ़ेल हो गए, मैं पास हो गया और दरजे में प्रथम आया। मेरे और उनके बीच में केवल दो साल का अंतर रह गया। जी में आया, भाई साहब को आड़े हाथों लूँ - “आपकी वह घोर तपस्या कहाँ गई ?' मुझे देखिए, मज़े से खेलता भी रहा और दरजे में अव्वल भी हूँ।' लेकिन वह इतने दुखी और उदास थे कि मुझे उनसे दिली हमदर्दी हुई और उनके घाव पर नमक छिड़कने का विचार ही लज्जास्पद जान पड़ा। हाँ, अब मुझे अपने ऊपर कुछ अभिमान हुआ और आत्मसम्मान भी बढ़ा । भाई साहब का वह रौब मुझ पर न रहा। आज़ादी से खेलकूद में शरीक होने लगा। दिल मज़बूत था। अगर उन्होंने फिर मेरी फ़जीहत की, तो साफ़ कह दूँगा - 'आपने अपना खून जलाकर कौन - सा तीर मार लिया। मैं तो खेलते - कूदते दरजे में अव्वल आ गया।' ज़बान से यह हेकड़ी जताने का साहस न होने पर भी मेरे रंग - ढंग से साफ़ ज़ाहिर होता था कि भाई साहब का वह आतंक मुझ पर नहीं था। भाई साहब ने इसे भाँप लिया - उनकी सहज बुद्ध बड़ी तीव्र थी और एक दिन जब मैं भोर का सारा समय गुल्ली - डंडे की भेंट करके ठीक भोजन के समय लौटा, तो भाई साहब ने मानो तलवार खींच ली।
  1. कक्षा में प्रथम आने पर छोटे भाई के व्यवहार में बड़े भाई साहब के प्रति झलकने लगा:   [1]
    1. प्रसन्नता
    2. अहंकार
    3. स्वाभिमान
    4. गर्व
  2. छोटा भाई बड़े भाई साहब को आड़े हाथों लेना चाहता था परंतु ऐसा कर नहीं पाया, क्यों?   [1]
    1. उनकी डाँट-डपट का डर था
    2. उसकी हिम्मत नहीं पड़ी
    3. लोक-लाज का डर था 
    4. उनसे हमदर्दी हो आई
  3. छोटे भाई के अव्वल आने पर भाई साहब के व्यवहार में क्या अंतर आया?   [1]
    1. वे और अधिक ध्यानपूर्वक पढ़ने लगे
    2. उनके रौब में थोड़ी नरमी आ गई
    3. वे भी खेल - कूद में भाग लेने लगे
    4. अपनी पीड़ा भूलकर बेहद प्रसन्न हो गए
  4. निम्नलिखित कथन तथा कारण को पढ़कर दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:   [1]

    कथन
    : भाई साहब गुस्सा हो गए और उन्होंने तलवार खींच ली।
    कारण: छोटा भाई सुबह से शाम तक गुल्ली-डंडा खेलकर लौटा था।

    विकल्प:

    1. कथन और कारण दोनों गलत हैं।
    2. कथन सही है लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है।
    3. कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।
    4. कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  5. कौन-सा/से वाक्य गद्यांश से मेल खाते हैं?   [1]

    1. वार्षिक परीक्षा में हर बार की तरह छोटा भाई भी अच्छे अंकों से पास हो गया।
    2. भाई साहब दुखी और उदास हो गए थे।
    3. छोटे भाई ने अपने हाव-भाव से दर्शा दिया कि उन दोनों में कोई बराबरी नहीं है।
    4. अब बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को कुछ भी कहना पूरी तरह से छोड़ दिया था।
      विकल्प:
      1.  I, II
      2. केवल III
      3. II, III
      4. III. IV

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