हिंदी

निम्नलिखित पंक्ति के काव्य-सौंदर्य को उद्घाटित कीजिए: थोड़ा-सा विश्वासथोड़ा-सी उम्मीदथोड़े-से सपनेआओ, मिलकर बचाएँ।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित पंक्ति के काव्य-सौंदर्य को उद्घाटित कीजिए:

थोड़ा-सा विश्वास
थोड़ा-सी उम्मीद
थोड़े-से सपने
आओ, मिलकर बचाएँ।

संक्षेप में उत्तर
Advertisements

उत्तर

इस अंश में कवयित्री अपने प्रयासों से लोगों की उम्मीदें, विश्वास व सपनों को जीवित रखना चाहती है। समाज में बढ़ते अविश्वास के कारण व्यक्ति का विकास रुक-सा गया है। वह सभी लोगों से मिलकर प्रयास करने का आहवान करती है। उसका स्वर आशावादी है। ‘थोड़ा-सा’, ‘थोड़ी-सी’ वे ‘थोड़े-से’ तीनों प्रयोग एक ही अर्थ के वाहक है। अतः अनुप्रास अलंकार है। दूर्द (उम्मीद), संस्कृत (विश्वास) तथा तद्भव (सपने) शब्दों को मिला-जुला प्रयोग किया है। तुक, छंद और संगीत विहीन होते हुए कथ्य में आकर्षण है। खड़ी बोली है।

shaalaa.com
आओ, मिलकर बचाएँ
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 2.1: आओ, मिलकर बचाएँ - अभ्यास [पृष्ठ १८३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Aaroh bhag 1 Class 11
अध्याय 2.1 आओ, मिलकर बचाएँ
अभ्यास | Q 6. (ख) | पृष्ठ १८३
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×