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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए- तब हार पहार से लागत हे, अब बीच में आन पहार परे।

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प्रश्न

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

तब हार पहार से लागत हे, अब बीच में आन पहार परे।

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उत्तर

तब हार पहार से लागत हे, अब बीच में आन पहार परे। – प्रस्तुत पंक्ति का आशय है कि जब कवि प्रेयसी के साथ रहता था, तो उसे प्रेमिका के बाहों का हार अपने शरीर पर पहाड़ के समान लगता था। परन्तु वह कहता है कि आज की स्थिति भिन्न है और हम दोनों अलग-अलग हैं तथा हम दोनों के मध्य में पहाड़ के रूप में वियोग विद्यमान है। भाव यह है कि वियोग के कारण दोनों एक-दूसरे से बहुत दूर हो गए हैं।

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सवैया
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अध्याय 1.09: घनानंद (कवित्त/सवैया) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ६८]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 1.09 घनानंद (कवित्त/सवैया)
प्रश्न-अभ्यास | Q 7. (ङ) | पृष्ठ ६८

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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
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