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निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए: उसने प्राण की बाजी लगा दी।

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प्रश्न

निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

उसने प्राण की बाजी लगा दी।

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

उसने जान की बाजी लगा दी।

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व्याकरण
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अध्याय 1.09: वरदान माँगूँगा नही - भाषा बिंदु [पृष्ठ ३३]

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बालभारती Hindi Lokbharati [English] Standard 9 Maharashtra State Board
अध्याय 1.09 वरदान माँगूँगा नही
भाषा बिंदु | Q ५. | पृष्ठ ३३

संबंधित प्रश्न

क्रिया का लिंग और वचन सामान्यतः कर्ता और कर्म के लिंग और वचन के अनुसार निर्धारित होता है। वाक्य में कर्ता और कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार जब क्रिया के लिंग, वचन आदि में परिवर्तन होता है तो उसे अन्विति कहते हैं।
क्रिया के लिंग, वचन में परिवर्तन तभी होता है जब कर्ता या कर्म परसर्ग रहित हों;
जैसे- सवार कारतूस माँग रहा था। (कर्ता के कारण)
सवार ने कारतूस माँगे। (कर्म के कारण)
कर्नल ने वज़ीर अली को नहीं पहचाना। (यहाँ क्रिया, कर्ता और कर्म किसी के भी कारण प्रभावित नहीं है)

अतः कर्ता और कर्म के परसर्ग सहित होने पर क्रिया कर्ता और कर्म से किसी के भी लिंग और वचन से प्रभावित नहीं होती और वह एकवचन पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है। नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-

  1. घोड़ा पानी पी रहा था।
  2. बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
  3. रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।
  4. देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।

सूचना के अनुसार शब्‍द में परिवर्तन कीजिए: 


निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो 

नाखून


उपसर्ग/प्रत्‍यय अलग करके मूल शब्‍द लिखो :

भारतीय, आस्‍थावान, व्यक्‍तित्‍व, स्‍नेहिल, बेबात, निरादर, प्रत्‍येक, सुयोग


निम्‍नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक हिंदी शब्द का अर्थ लिखो तथा उन शब्द का अलग-अलग पूर्ण वाक्‍यों में प्रयोग कराे :

वार


निम्‍नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक हिंदी शब्द का अर्थ लिखो तथा उन शब्द का अलग-अलग पूर्ण वाक्‍यों में प्रयोग कराे :

सीना


निम्‍न वृत्‍त में दिए संज्ञा तथा विशेषण शब्‍दों को छाँटकर तालिका में उचित स्‍थानों पर उनके भेद सहित लिखो :

  • नदी
  • पहाड़ी
  • सीता
  • वह लकड़हारा
  • पानी
  • चार किलो
  • गरीबी
  • ईमानदारी
  • गंगा
  • पालक
  • दस
  • चाँदी
  • कोई
  • सभा
  • धनी
संज्ञा भेद विशेषण भेद
______ ______ ______ ______
______ ______ ______ ______
______ ______ ______ ______
______ ______ ______ ______
______ ______ ______ ______
______ ______ ______ ______

शालेय बैंड पथक के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने हेतु अपने विद्‍यालय के प्राचार्य से विद्‌यार्थी प्रतिनिधि के नाते अनुमति माँगते हुए निम्‍न प्रारूप में पत्र लिखो:

दिनांक:
प्रति,

______
______

विषय : ______
संदर्भ : ______

महोदय,
विषय विवेचन

                    ______________________________

                    ______________________________

                    ______________________________

आपका/आपकी आज्ञाकारी,
______________________________
(विद्‍यार्थी प्रतिनिधि)
कक्षा : ______


निम्न वाक्‍य में कारक रेखांकित कर उनके नाम और चिह्न लिखकर पाठ से अन्य वाक्‍य खोजकर लिखिए:

श्रीमती भटनागर ने दरवाजे पर फिर से वैसे ही गाड़ी के पहियों के निशान देखे।


निम्न वाक्‍य में कारक रेखांकित कर उनके नाम और चिह्न लिखकर पाठ से अन्य वाक्‍य खोजकर लिखिए:

हे मानव, मुझे क्षमा कर मैं पृथ्‍वी से बहुत दूर पहुँच चुका हूँ।


निम्न संधि का विग्रह कर उसका प्रकार लिखिए:

थोड़ी ही देर में हाॅटेल के स्‍वागत में आसीन थे।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

यह भोजन दस आदमी के लिए है।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

कश्मीर में कई दर्शनीय स्थल देखने योग्य है।


सहायक क्रिया का वाक्‍य में प्रयोग कीजिए।

पड़ना


निम्नलिखित मुहावरे/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:

टोपी - पहनना - ______ - ______ 


निम्नलिखित शब्दों के लिंग बदलो और वाक्य बनाकर लिखो: 

१. चाचा जी प्रकल्प में मेरा मार्गदर्शन करते हैं।

५. ______________________________ 

२. ______________________________

६. ______________________________
३. ______________________________ ७. ______________________________

४. ______________________________

८. ______________________________

उचित विराम चिह्न लगाओ:

बालभारती हिंदी की पुस्तकें हैं।
सुलभभारती

‘रमेश पुस्तक पढ़ता है।’ इस वाक्य को सभी काल में परिवर्तित करके भेदों सहित बताओ और लिखो।


दर्पण में देखकर पढ़ो।


निम्नलिखित शब्दों का रोमन लिपि में लिप्यंतरण करो। 

  


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

होनहार बिरवान के होत चीकने पात


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

ऐसा एक भी मनुष्य नहीं जो संसार में कुछ न कुछ लाभकारी कार्य न कर सकता हो


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

द्रव्य उपादान कारण शक्कर से मिठाई बनाई जाती है


शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह   शब्द विलोम
अति + अधिक   × न्यूनतम

शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह शब्द विलोम
+ अभ्‍युत्‍थान ×

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
सन्मति ______ + ______  

वचन बदलिए।

एक = ______


कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।

उपर्युक्‍त अंश से पंद्रह शब्‍द ढूँढ़िए उनमें प्रत्‍यय लगाकर शब्‍दों को पुनः लिखिए।


निम्‍नलिखित मुहावरा, कहावत में गलत शब्‍द के स्‍थान पर सही शब्‍द लिखकर उन्हें पुनः लिखिए:

गीत न जाने आँगन टेढ़ा


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