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प्रश्न
नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर दीजिए-
कल्पना कीजिए कि आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम के आगमन से लेकर उनके गमन तक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
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उत्तर
यदि मैं राजा जनक की सभा में उपस्थित एक राजा होता, तो वह दिन मेरे लिए अत्यंत अजीब और भय से भरा अनुभव होता। हम सभी राजा स्वयंवर के लिए वहाँ एकत्र थे और पूरा वातावरण उत्साहपूर्ण था। तभी अचानक परशुराम जी का आगमन हुआ। उनका उग्र रूप देखकर हम सभी डर गए और तुरंत उठकर उन्हें प्रणाम किया।
जब उन्हें पता चला कि शिव-धनुष टूट गया है, तो वे बहुत क्रोधित हो गए और कठोर शब्द कहने लगे। सभा में पूरी तरह सन्नाटा छा गया और कोई भी उत्तर देने का साहस नहीं कर पा रहा था। लक्ष्मण जी के तीखे उत्तरों से उनका क्रोध और बढ़ गया, लेकिन श्रीराम ने अत्यंत विनम्रता और शांति से बात की, जिससे उनका क्रोध धीरे-धीरे शांत होने लगा।
अंत में परशुराम जी को सत्य का बोध हुआ और वे शांत होकर वहाँ से चले गए। यह संपूर्ण घटना मेरे लिए भय, आत्मविश्वास और एक महत्वपूर्ण सीख से भरा अनुभव थी।
