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प्रश्न
नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर दीजिए-
“अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।” जनक द्वारा डर से चुप रहने पर अन्य राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए होंगे?
(संकेत – सोचिए, यह मनुष्य के व्यवहार की किस सच्चाई को उजागर करता है?)
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उत्तर
इस पंक्ति में यह दर्शाया गया है कि जब राजा जनक भय के कारण कोई उत्तर नहीं दे सके, तो कुछ ईर्ष्यालु और कुटिल राजा भीतर ही भीतर प्रसन्न हो गए। संभवतः इसका कारण यह था कि वे जनक की प्रतिष्ठा और सम्मान से ईर्ष्या रखते थे। जनक एक आदर्श और सम्मानित शासक माने जाते थे, इसलिए उनकी असहाय और मौन स्थिति को देखकर उन राजाओं को मन ही मन संतोष मिला होगा।
यह प्रसंग मानव स्वभाव की एक सच्चाई को उजागर करता है- ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा की भावना। अक्सर लोग दूसरों की सफलता से खुश नहीं होते, बल्कि उनकी परेशानी या कमजोरी में सुख महसूस करते हैं। यह एक नकारात्मक प्रवृत्ति है जो कई बार मनुष्य के भीतर छिपी रहती है।
इससे हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों की कठिनाइयों पर प्रसन्न होने के बजाय हमें सहानुभूति और सहयोग का भाव रखना चाहिए।
