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मैंने समझा फूल और काँटे कविता से - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

मैंने समझा फूल और काँटे कविता से 

अति संक्षिप्त उत्तर
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उत्तर

किसी भी बड़े व गौरवशाली कुल में सिर्फ जन्म लेने से कोई बड़ा अथवा सम्माननीय नहीं बन जाता। व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार ही समाज में मान-सम्मान मिलता है। यदि कर्म बुरे होंगे तो निंदा और यदि कर्म अच्छे होंगे तो प्रशंसा मिलती है।

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पद्य (7th Standard)
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अध्याय 1.02: फूल और काँटे - मैंने समझा [पृष्ठ ३]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati [English] Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 1.02 फूल और काँटे
मैंने समझा | Q (१) | पृष्ठ ३
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