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मानव और प्राकृतिक आपदाएँ संकेत बिन्दुः भूमिका, प्रकृति और मानव का नाता, मानव द्वारा बिना सोचे-विचारे प्रकृति का दोहन, कारण एवं प्रभाव, प्रकृति के रौद्र रूप के लिए दोषी कौन, निष्कर्ष - Hindi Course - A

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प्रश्न

निम्नलिखित विषय पर संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 150 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए-

मानव और प्राकृतिक आपदाएँ

संकेत बिन्दुः भूमिका, प्रकृति और मानव का नाता, मानव द्वारा बिना सोचे-विचारे प्रकृति का दोहन, कारण एवं प्रभाव, प्रकृति के रौद्र रूप के लिए दोषी कौन, निष्कर्ष

दीर्घउत्तर
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उत्तर

मानव और प्राकृतिक आपदाएँ

प्रकृति और मनुष्य का अनादि काल से घनिष्ठ संबंध रहा है। मानव प्रकृति पर आश्रित है तो प्रकृति मानव पर। इसलिए प्रकृति को मानव की सहचरी कहा गया है। समय -समय ने मानव ने अपने लाभ के लिए बिना सोचे समझे प्रकृति को अपने अनुसार ढालने की कोशिश की है जिसका हर्जाना स्वयं मानव को ही देना पड़ा है। प्रकृति ने बिना विचारे मानव को बहुत कुछ दिया है परंतु परंतु अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए मानव ने प्रकृति को हमेशा ही नुकसान पहुँचाया है। परंतु कभी-कभी प्रकृति का अत्यंत विनाशकारी रूप भी देखने को मिलता है -जैसे बाढ़, ओलावृष्टि, समुद्री तूफ़ान, भूकंप, सुनामी आदि। इससे रेल, सड़क, हवाईमार्ग बाधित हो जाते हैं। वन्य जीव नष्ट हो जाते हैं, वातावरण प्रदूषित हो जाता है। इन प्रकृतिक आपदावों के कारण बहुत हानि होती है तथा मनुष्य मूढ़ एवं निरीह दर्शक बन कर देखता रह जाता है, कुछ भी नहीं कर पाता। यद्यपि इन प्राकृतिक विपदाओं को रोकने के लिए वैज्ञानिक उपाय खोजने में संलग्न हैं, परंतु सुनामी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि जैसी प्राकृतिक विपदाओं को रोक पाना मनुष्य के बस में नहीं है। हाँ, इनमे से कुच पर रोक लगाने के लिए मनुष्य को प्रकृति से छेड़छाड़ बंद करनी होगी तथा प्राकृति का विनाश रोकना होगा।

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Notes

  • भूमिका - 1 अंक
  • विषयवस्तु - 3 अंक
  • भाषा - 1 अंक
अनुच्छेद लेखन
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