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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए-
दौड़ती हुई जिंदगी
संकेत-बिंदु -
- कैसे
- कारण
- आवश्यकताओं में वृद्धि
- क्यों करें?
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उत्तर
दौड़ती हुई जिंदगी
समय की रफ़्तार न कभी कम होती है न ज्यादा किंतु आज ऐसा लगता है कि समय रेत की तरह हाथों से फिसलता ही जा रहा है। जिंदगी दौड़ रही है। जिसको देखो वह तेजी में है। हर जगह रफ़्तार देखने को मिलती है। सड़कों पर यातायात दौड़ रहा है, कारखानों में मशीनें दौड़ रही हैं, घड़ी की सुइयाँ भी भागती सी नजर आती है। दौड़ के पीछे आखिर कारण क्या है? हम इतना भाग कर क्या हासिल करना चाहिए? यह सोचने का भी किसी के पास वक्त नहीं है। रफ़्तार का मूल कारण जिम्मेदारियाँ नहीं बल्कि बढ़ती हुई इच्छाएँ हैं। आवश्यकताएँ तो धीमी रफ़्तार से चलते हुए भी पूरी हो सकती हैं, किंतु यह दौड़ इच्छाओं की है। तेज दौड़ कर एक इच्छा पूरी होती है तो अगली सामने खड़ी होती है। उसके लिए और तेज दौड़ना पड़ता है और इस प्रकार दौड़ने की रफ़्तार बढ़ती जा रही है और उसी अनुपात में इच्छाएँ भी बढ़ती ही जा रही हैं। इस दौड़ पर कहीं न कहीं रोक लगानी पड़ेगी अन्यथा जीवन के अंत में यह अफसोस अवश्य होगा कि हमने क्या पाने के लिए और क्या-क्या खो दिया। हमें संतुलन बनाना आना चाहिए। अनगिनत इच्छाओं को पूरा करने के लिए हम सब कुछ दाँव पर लगा देते हैं और एक समय ऐसा आता है कि बहुत कुछ होता है किंतु स्वास्थ्य और संबंधों को खो देते हैं और बड़े से बड़े सुख साधन भी हमारे किसी काम के नहीं रह जाते। फिर पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत। अतः समय रहते हम अपने जीवन की रफ़्तार को कम कर लें, इच्छाओं को सीमित कर लें, इसी में सबसे बड़ा सुख और संतोष है।
Notes
- विषयवस्तु - 3 अंक
- भाषा - 1 अंक
- प्रस्तुति - 2 अंक
