हिंदी

माध्यमभाषया उत्तरं लिखत। ‘मानवताधर्मः’ इति काव्यस्य आधारेण मानवताधर्मस्य वर्णनं कुरुत।

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प्रश्न

माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।

‘मानवताधर्मः’ इति काव्यस्य आधारेण मानवताधर्मस्य वर्णनं कुरुत।

दीर्घउत्तर
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उत्तर १

English:

Humanism is dealing with others, by being aware that there are other people and animals just like us, and they have the same mind (feelings) as us. At the end, all religions say the same truth. Humanism only recognises the theology of all religions. Everyone should accept this religion, which brings practical/worldly prosperity and welfare. Humanism is the essence, the core and the soul of all religions.

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उत्तर २

मराठी:

मानवतावाद हा अर्थात त्यांच्याबद्दल विचार करणे, की त्यांच्याबद्दल इतर मानव आणि प्राणी आहेत जसे की आम्ही आणि त्यांनी आपल्या विचारांमध्ये समान दिलेली मन (भावना) आहे. शेवटी, सर्व धर्म एकाच सत्याचे म्हणतात. मानवतावादाने फक्त सर्व धर्मांच्या दार्शनिक मूल्ये ओळखल्या जातात. प्रत्येकाने हा धर्म स्वीकार करण्याची गरज आहे, जो प्रायोगिक/जगभरातील समृद्धी आणि कल्याण लावते. मानवतावाद सर्व धर्मांचा सार आहे, जीवात्म्या आणि सर्व धर्मांची आत्मा आहे.

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उत्तर ३

हिंदी:

मानवतावाद का अर्थ है दूसरों के साथ इस जागरूकता के साथ व्यवहार करना कि हमारे ही जैसे अन्य लोग और जानवर भी मौजूद हैं, और उनके पास भी हमारे जैसी ही चेतना (भावनाएँ) हैं। अंततः, सभी धर्म एक ही सत्य का प्रतिपादन करते हैं। मानवतावाद सभी धर्मों के केवल उस धर्म-तत्व को मान्यता देता है। प्रत्येक व्यक्ति को इस धर्म को अपनाना चाहिए, जो व्यावहारिक एवं सांसारिक समृद्धि तथा कल्याण सुनिश्चित करता है। मानवतावाद ही समस्त धर्मों का सार, मूल-तत्व और आत्मा है।

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मानवताधर्मः।
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अध्याय 11: मानवताधर्मः। (पद्यम्‌) - भाषाभ्यास: [पृष्ठ ६२]

APPEARS IN

बालभारती Sanskrit Composite Anand [English] Standard 10 Maharshtra State Board
अध्याय 11 मानवताधर्मः। (पद्यम्‌)
भाषाभ्यास: | Q ४. आ) | पृष्ठ ६२

संबंधित प्रश्न

माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।

मनुजा वाचनेनैव बोधन्ते विषयान्‌ बहून्‌।
दक्षा भवन्ति कार्येषु वाचनेन बहुश्रुताः।।


पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।

सकला नद्यः कं प्रविशन्ति?


पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।

कः सर्वधर्मान् व्याप्नोति?


पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।

भानुः कं प्रकाशयति?


सन्धिविग्रहं कुरुत।

भानुर्भुवनमण्डलम् = ...... + भुवनमण्डलम्।


पाठात् ल्यबन्त-अव्ययानि चित्वा लिखत।


सूचनानुसारं कृती: कुरुत।

सर्वधर्मान् परित्यज्य ध्रुवं मानवतां भज। (पूर्वकालवाचकं निष्कासयत।)


सूचनानुसारं कृती: कुरुत।

भानुः भुवनमण्डलं प्रकाशयति। (णिजन्तं निष्कासयत।)


समानार्थकशब्दमेलनं कुरुत।

(१) सरि (२) रङ्गः (३) अम्भः (४) दिनकृत्‌ (५) मार्गः

(अ) वण (आ) भानुः (इ) नदी (ई) पन्थाः (उ) सलिलम्‌


माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।

मानवताधर्मः अभ्युदयकृत् कथं वर्तते?


माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।

कदा मानवता भवेत्?


माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।

सर्वे धर्माः मानवताधर्मं समाश्रिताः इति सोदाहरणं स्पष्टीकुरुत।


जालरेखाचित्रं पूरयत।



क्रियापद-तालिकां पूरयत।

एकवचनम्‌ द्विवचनम्‌
बहुवचनम्‌
पुरुषः लकारः
नर्तिष्यति ______ ______ प्रथमः लृट्‌

नामतालिकां पूरयत।

ए.व.  द्विव. ब.व. विभक्तिः
______ ऋत्विग्भ्याम्‌ ______ तृतीया

पृथक्करणं कुरुत।

नाम सर्वनाम
   
   

(मञ्जूषा - मम, राजा, एतौ, साधवः)


पृथक्करणं कुरुत।

नाम सर्वनाम
   
   

(मञ्जूषा - शाखी, वयम्‌, पिता, ताः)


पृथक्करणं कुरुत।

नाम सर्वनाम
   
   

(मञ्जृषा - कस्मै, यया, रथैः तीरे)


पृथक्करणं कुरुत।

नाम सर्वनाम
   
   

(मज्जूषा - इमानि, शब्देषु, एतया, बाल्ये)


पृथक्करणं कुरुत।

क्रियापदम्‌ धातुसाधित-विशेषणम्‌
   
   

(मञ्जूषा - त्यजतु, हतः, अब्रूत, पीतः)


पृथक्करणं कुरुत।

क्रियापदम्‌ धातुसाधित-विशेषणम्‌
   
   

(मञ्जूषा - क्रुद्धः, अददात्‌, प्रजायते, दृश्यम्‌)


नामतालिकां पूरयत।

ए.व.  द्विव. ब.व. विभक्तिः
धाम्ना ______ ______ तृतीया

माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत। 

एकीभूय यथा सर्वे वर्णा गच्छन्ति शुक्लताम्‌।
तथा सम्भूय शंसन्ति धर्मा मानवतागुणम्‌।।


माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।

षड्जमूला यथा सर्वे सङ्गीते विविधाः स्वराः।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्माः समाश्रिताः।।


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