Advertisements
Advertisements
प्रश्न
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | श्रेष्ठिनौ | ______ | प्रथमा |
Advertisements
उत्तर
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| शरष्ठी | श्रेष्ठिनौ | श्रेष्ठिन: | प्रथमा |
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
मनुजा वाचनेनैव बोधन्ते विषयान् बहून्।
दक्षा भवन्ति कार्येषु वाचनेन बहुश्रुताः।।
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
सर्वं व्याप्नोति सलिलं शर्करा लवणं यथा।
एवं मानवताधर्मो धर्मान् व्याप्नोति सर्वथा।।
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
सकला नद्यः कं प्रविशन्ति ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
कां भज इति कविः वदति ?
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
प्रकाशयत्येकस्तथा = ______ + ______ + तथा ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
व्यवहरेल्लोके = ______ + लोके ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
एषोऽभ्युदयकृत् = एषः + ______।
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
सर्वधर्मान् परित्यज्य ध्रुवं मानवतां भज । (पूर्वकालवाचकं निष्कासयत।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
नद्यः महोदधिं प्रविशन्ति ।
(कर्तृपदम् एकवचने परिवर्तवत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
त्वं सर्वधर्मान् परित्यज्य मानवतां भज ।
(‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत ।)
समानार्थकशब्दमेलनं कुरुत
| 1 | सरि | (अ) | वण |
| 2 | रङ्गः | (आ) | भानुः |
| 3 | अम्भः | (इ) | नदी |
| 4 | दिनकृत् | (ई) | पन्थाः |
| 5 | मार्गः | (उ) | सलि |
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
मानवताधर्मः अभ्युदयकृत् कथं वर्तते?
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
कदा मानवता भवेत्?
विशेष्यैः रिक्तस्थानानि पूरयत ।
'क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| ______ | दिशेथे | ______ | मध्यमः | लट् |
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| ______ | ______ | अमिलाम | उत्तमः | लङ् |
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ मम, राजा, एतौ, साधवः)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - मनसा, अस्याः, प्राणान्, अयम्)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - त्यजतु, हतः, अब्रूत, पीतः)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ भेतव्यम्, जानाति, ददाति, मुक्तः)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - अददात्, क्रुद्धः, प्रजायते, दृश्यम्)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मज्जूषा ~ रमणीयम्, श्रयेत्, प्राप्ता, भुङ्क्ते)
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ______ | स्रग्भ्य: | चतुर्थी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| दिशि | ______ | ______ | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ______ | योगिषु | सप्तमी |
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
षड्जमूला यथा सर्वे सङ्गीते विविधाः स्वराः।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्माः समाश्रिताः।।
माघ्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
यथैव सकला नद्य: प्रविशन्ति महोदधिम्।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्मा: समाश्रिताः॥
