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प्रश्न
लेखन में कृतिकार के स्वभाव और अनुशासन की महत्ता स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
लेखन में कृतिकार के स्वभाव और अनुशासन दोनों का ही महत्त्व होता है क्योंकि कुछ कृतिकार ऐसे होते हैं जो बाहरी दबाव के बिना लिख ही नहीं सकते हैं। इसी से उनकी भीतरी विवशता व्याकुलता में बदल पाती है और लिखने को विवश होते हैं।
उदाहरणार्थ : कोई व्यक्ति सवेरे के समय नींद खुल जाने पर भी तब तक बिस्तर पर अलसाया पड़ा रहता है जब तक कि घड़ी का अलार्म न बज जाए। अतः कृतिकार का स्वभावतः अनुशासित होना आवश्यक है।
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