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लेखक ने किस तरह अत्यंत सूझ-बूझ से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया? ‘स्मृति’ पाठ के आलोक में स्पष्ट कीजिए। इससे आपको क्या सीख मिलती है?

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प्रश्न

लेखक ने किस तरह अत्यंत सूझ-बूझ से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया? ‘स्मृति’ पाठ के आलोक में स्पष्ट कीजिए। इससे आपको क्या सीख मिलती है?

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उत्तर

‘स्मृति’ पाठ में लेखक को उसके भाई ने डाक में डालने की चिट्ठियाँ दी थीं। उसकी असावधानी के कारण ये चिट्ठियाँ उस कुएँ में गिर गईं, जिसमें विषधर बैठा था। उसके पास से चिट्ठियाँ उठाना शेर के जबड़े से माँस खींचने जैसा कठिन और जोखिम भरा था, जिसमें जरा-सी चूक जानलेवा साबित हो सकती थी। यद्यपि ऐसा करने के पीछे एक ओर उसमें जिम्मेदारी का भाव था, तो दूसरी ओर भाई से पिटने का भय परंतु उसने अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास, धैर्य, विपरीत परिस्थितियों में बुद्धिमानी से काम करने की कला के कारण वह मौत के मुँह से चिट्ठियाँ उठा लिया और मौत को ठेंगा दिखा दिया। इस घटना से हमें यह सीख भी मिलती है कि ऐसी घटनाओं को हमें प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए और ऐसा कार्य करने से पहले अपने से बड़ों की राय-सलाह अवश्य लेनी चाहिए, ताकि हम किसी अनहोनी का शिकार न बनें।

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गद्य (Prose) (Class 9 B)
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अनुस्वार

  अनुनासिक

(क)

अंदर

(क)

ढूँढ़ते

(ख)

____________

(ख)

____________

(ग)

____________

(ग)

____________

(घ)

____________

(घ)

____________

(ङ)

____________

(ङ)

____________


निम्नलिखित उपसर्गों का प्रयोग करके दो-दो शब्द बनाइए −
ला, बिला, बे, बद, ना, खुश, हर, गैर


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