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प्रश्न
L लम्बाई के एक तार को मोड़कर बारी-बारी से
- N फेरों की एक वर्गाकार कुंडली तथा
- N फेरों की एक वृत्ताकार कुंडली बनाई जाती है।
दोनों प्रकरणों में बनी कुंडली अपने तल के साथ संपाती एक अक्ष के परितः ऊर्ध्वाधरतः किसी एकसमान, क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र में घूमने के लिए स्वतंत्र है और इनमें समान धारा प्रवाहित हो रही है। वर्गाकार कुंडली पर लगने वाले बल-आघूर्ण एवं वृत्ताकार कुंडली पर लगने वाले बल-आघूर्ण के अधिकतम मानों के अनुपात का परिकलन कीजिए।
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उत्तर
माना वर्गाकार कुंडली की भुजा a है।
N फेरों के लिए तार की कुल लंबाई:
L = N × 4a
a = `L/(4 N)` ...(i)
वर्ग का क्षेत्रफल:
As = a2
= `(L/(4 N))^2` ...[समीकरण (i) से]
= `L^2/(16 N^2)`
माना त्रिज्या r है।
तार की कुल लंबाई (L) = N × 2πr
r = `L/(2 pi N)` ...(ii)
वृत्त का क्षेत्रफल (Ac) = πr2
= `pi (L/(2 pi N))^2` ...[समीकरण (ii) से]
= `L^2/(4 pi N^2)`
बल-आघूर्णों का अनुपात:
`tau_s/tau_c = A_s/A_c`
= `(L^2/(16 N^2))/(L^2/(4 pi N^2))`
= `1/16 xx 4 pi`
= `pi/4`
अतः `tau_"square"/tau_"circle" = pi/4`
