प्रस्तुत कविता में कवि ने वसंत ऋतु के सौंदर्य का वर्णन किया है। इस ऋतु में खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं, गेहूँ की बालियाँ लहलहाती हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है। कोयल की मधुर कूक, फूलों पर मंडराती तितलियाँ तथा मनमोहक सुगंध वातावरण को रमणीय बना देती हैं। प्रकृति के इसी रूप का सुंदर चित्रण कवि ने अपनी कविता में किया है।
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प्रश्न
कविता में किस मौसम के सौंदर्य का वर्णन है?
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उत्तर
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भाव स्पष्ट कीजिए -
(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई।
(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,
न खाकर बनेगा अहंकारी।
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