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प्रश्न
कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-
शहर की भीड़
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उत्तर
शहर की भीड़ - “जिसे देखिए, वही पंडितजी के इस व्यवहार को पर टीका-टिप्पणी कर रहा था, निंदा की बौछारें हो रही थीं, मानों संसार से अब पापी का पाप कट गया| पानी को दूध के नाम से बेचने वाला ग्वाला, कल्पित रोजनामचे भरनेवाले अधिकारी वर्ग, रेल में बिना टिकट सफ़र करने वाले बाबु लोग, जाली दस्तावेज बनाने वाले सेठ और साहूकार, यह सब-के-सब देवताओं की भांति गर्दन चला रहे थे।”
प्रस्तुत उद्धरण से पता चलता है कि सब-के-सब भ्रष्टाचार में लिप्त हैं लेकिन तमाशा देखने के लिए आतुर रहते हैं। पंडित अलोपीदीन के गिरफ्तार होने पर शहर की भीड़ टीका-टिप्पणी करने में पीछे नहीं रहती जबकि वो स्वयं गलत हैं। इससे समाज की संवेदनहीनता का पता चलता है।
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कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-
वृद्ध मुंशी
कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं। निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-
वकील
“नमक का दारोगा' कहानी के कोई दो अन्य शीर्षक बताते हुए उसके आधार को भी स्पष्ट कीजिए।
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पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-
जब आपको पढ़ना-लिखना व्यर्थ लगा हो।
पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-
जब आपको पढ़ना-लिखना सार्थक लगा हो।
पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-
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