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प्रश्न
जंगल, पेड़-पौधों और प्रकृति से संबंधित कुछ कविताओं के बारे में जानकारी प्राप्त करो। "जंगल" शीर्षक से दी गई कविता को पढ़ो और अपने दोस्तों को सुनाओ।
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उत्तर
- 'शाम-एक किसान' (सर्वेश्वरदयाल सक्सेना) कविता पढ़िए। इसमें कवि ने प्रकृति का बड़ा सुंदर चित्रण किया है।
- 'ग्राम श्री' (सुमित्रानंदन पंत) कविता पढ़िए। इसमें कवि ने प्रकृति का सजीव ढंग से बड़ा मनोहारी चित्रण किया है।
- 'चंद्र गहना से लौटती बेर' (केदारनाथ अग्रवाल) कविता पढ़िए। इसमें कवि ने पौधों को मनुष्य के समान कार्य करते हुए दिखाया है।
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| नमूना → |
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात।
|
| चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे। |
उस तरु से इस तरु पर आता,
जाता हूँ धरती की ओर।
उड़ने के बाद चुरुंगुन कहाँ-कहाँ गया होगा? उसने क्या-क्या देख होगा? अपने शब्दों में लिखो।
हमारे देश में पुराने समय से ही पेड़-पौधों को लगाने और उन्हें कटने से बचाने की परंपरा रही है। कई बार लोगों ने मिलकर पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन भी किया। ऐसे ही किसी आंदोलन के बारे में जानकारी इकट्ठी करके कॉपी में लिखो। इसके लिए तुम्हें पुस्तकालय, समाचार-पत्रों, शिक्षिका या माता-पिता और इंटरनेट से भी सहायता मिल सकती है।
रिक्त स्थान पूरे करो।
| नमूना → | वह मोर सा नाचता है। |
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| नमूना → |
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात।
|
| चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे। |
कच्चे-पक्के फल पहचाने,
खाए और गिराए काट।
नीचे कविता में से पंक्ति दी गई हैं। बताओ, इस पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
दीप बुझे हैं जिन आँखों के,
उन आँखों को ज्ञान मिलेगा।
