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प्रश्न
हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा है।
दुष्यंत की गज़ल का चौथा शेर पढ़ें और बताएँ कि गालिब के उपर्युक्त शेर से वह किस तरह जुड़ता है?
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उत्तर
कवि दुष्यंत के ग़ज़ल के चौथे शेर में कवि दुष्यंत ने ईश्वर के अस्तित्व के कल्पना मात्र से व्यक्ति के आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करने की बात कही है। ईश्वर के होने का सुंदर सपना ही लोगों की आँखों को सुकून देता है। इस प्रकार शेर में कवि ने उन लोगों पर व्यंग्य किया है जो वास्तविकता से दूर कल्पना मात्र से ही दिल को खुश कर लेते हैं। गालिब के शेर में भी स्वर्ग की वास्तविकता से सभी परिचित हैं लेकिन दिल को खुश करने के लिए उसकी सुंदर कल्पना करते हैं। इस प्रकार दोनों शेरों में वास्तविकता को परे रखकर काल्पनिक दुनिया के बारे में वर्णन किया गया है।
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भीड़
जिनके उत्तर निम्न शब्द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए :
जुगनू
जिनके उत्तर निम्न शब्द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए :
तितली
जिनके उत्तर निम्न शब्द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए:
आसमान
निम्नलिखित पंक्तियों से प्राप्त जीवनमूल्य लिखिए :
कोई ऐसी शक्ल ______
______ मुझे अक्सर दिखो ।
कृति पूर्ण कीजिए:


प्रस्तुत गजल की अपनी पसंदीदा किन्हीं चार पंक्तियों का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित पठित पद्यांश दी गई पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| एक जुगनू ने कहा मैं भी तुम्हारे साथ हूँ, वक्त की इस धुंध में तुम रोशनी बनकर दिखो। एक मर्यादा बनी है हम सभी के वास्ते, गर तुम्हें बनना है मोती सीप के अंदर दिखो। डर जाए फूल बनने से कोई नाजुक कली, तुम ना खिलते फूल पर तितली के टूटे पर दिखो। कोई ऐसी शक्ल तो मुझको दिखे इस भीड़ में, मैं जिसे देखूँ उसी में तुम मुझे अक्सर दिखो। |
1. पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए: (2)
- जुगनू - धुंध
- रोशनी - तितली
मैं
- ______
- ______
2.
i. निम्नलिखित के लिए पद्यांश से शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- लोगों का समूह - ______
- सीप में बनने वाला रत्न् - ______
ii. पद्यांश में आए 'पर' शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए: (1)
- ______
- ______
3. अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ २५ से ३० शब्दों में लिखिए: (2)
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो, चल पड़ी तो गर्द बनकर आसमानों पर लिखो, सिर्फ देखने के लिए दिखना कोई दिखना नहीं, जिंदगी की शक्ल जिसमें टूटकर बिखरे नहीं, |
(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए: (2)
| ‘अ’ | ‘आ’ |
| (i) शिखर | गर्द |
| (ii) आसमान | जिंदगी |
| (iii) पत्थर | स्वर्णिम |
| (iv) शक्ल | मील |
| नींव |
(2) उत्तर लिखिए: (2)
(i) मनुष्य को ये बनकर दिखाना है:
- ______
- ______
(ii) कवि दिखने के लिए कहते हैं:
- ______
- ______
(3) प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। (2)
आखिरी शेर में गुलमोहर की चर्चा हुई है। क्या उसका आशय एक खास तरह के फूलदार वृक्ष से है या उसमें कोई सांकेतिक अर्थ निहित है? समझाकर लिखें।
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'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है' यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है। मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ़ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरा वाक्य को पूरा करें।
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'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है' यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है। मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ़ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरा वाक्य को पूरा करें।
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