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प्रश्न
गोपियाँ दही क्यों बिलो रही थीं।
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उत्तर
गोपियाँ दही बिलोकर मक्खन निकालना चाह रही थीं।
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संबंधित प्रश्न
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
कठपुतली गुस्से से क्यों उबल पड़ी
कविता में कवि ने बगीचे के बारे में बहुत कुछ बताया है। बताओ, नीचे लिखी चीज़ों में से कौन-सी चीज़ें बगीचे में होंगी?
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कार |
फूल |
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क्यारियाँ |
चिड़ियाँ |
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सड़क |
फल |
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खेत |
तालाब |
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कारखाने |
पेड़ |
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कुर्सी |
कागज़ |
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पत्ता |
टहनी |
कविता की कुछ पंक्तियाँ छाँटकर लिखो जिनसे पता लगता है कि कवि को इस बात पर पूरा भरोसा है कि एक दिन सबको मान मिलेगा।
नीचे कविता में से पंक्ति दी गई हैं। बताओ, इस पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
हमको तुमको प्रान मिलेगा।
यह कविता आज़ादी मिलने से पहले के समय में लिखी गई थी। उस समय हमारे देश पर अंग्रेज़ों का राज था। किन पंक्तियों से पता चलता है कि लड़का/लड़की के काका स्वतंत्रता सेनानी थे?
नीचे लिखी पंक्ति को पढ़कर उत्तर दो।
"रोज त्योहार मनाएँगे।"
तुम्हारे विचार से क्या रोज़ त्योहार मनाना उचित है? क्यों?
कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती?
नीचे दो स्वतंत्रता आंदोलनों के वर्ष दिए गए हैं। इन दोनों आंदोलनों के दो-दो स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखिए-
(क) सन् 1857 ______ ______
(ख) सन् 1942 ______ ______
कई बार जब दो शब्द आपस में जुड़ते हैं तो उनके मूल रूप में परिवर्तन हो जाता है। कठपुतली शब्द में भी इस प्रकार का सामान्य परिवर्तन हुआ है। जब काठ और पुतली दो शब्द एक साथ हुए कठपुतली शब्द बन गया और इससे बोलने में सरलता आ गई। इस प्रकार के कुछ शब्द बनाइए-
जैसे-काठ (कठ) से बना-कठगुलाब, कठफोड़ा
| हाथ-हथ | सोना-सोन | मिट्टी-मट |
शाम के समय ये क्या करते हैं? पता लगाइए और लिखिए-
| पक्षी | खिलाड़ी | फलवाले | माँ |
| पेड़-पौधे | पिता जी | किसान | बच्चे |
शाम के बदले यदि आपको एक कविता सुबह के बारे में लिखनी हो तो किन-किन चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना को व्यक्त करेंगे? नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के आधार पर सोचिए
पेड़ों के झुनझुने
बजने लगे;
लुढ़कती आ रही है।
सूरज की लाल गेंद।
उठ मेरी बेटी, सुबह हो गई।
बहुविकल्पी प्रश्न
कौन-सी अँगीठी दहक रही है?
बहुविकल्पी प्रश्न
सूरज डूबते ही क्या हुआ?
बहुविकल्पी प्रश्न
पेड़ अपना फल स्वयं क्यों नहीं खाते हैं।
रहीम मनुष्य को धरती से क्या सीख देना चाहता है?
नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए-
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी,
तब ‘समझ’ ने यों मुझे ताने दिए।
• इन पंक्तियों में ऐंठ’ और ‘समझ’ शब्दों का प्रयोग सजीव प्राणी की भाँति हुआ है। कल्पना कीजिए, यदि ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ किसी नाटक में दो पात्र होते तो उनको अभिनय कैसा होता?
कवि की बेचैनी का क्या कारण था?
नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए-
‘माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।’
पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए।
बहुविकल्पी प्रश्न
किसके आने की आहट सुनकर मीरा प्रसन्न हो गई।
