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प्रश्न
एक स्थानीय समाचारपत्र में अपने शहर या ज़िले, पड़ोसी राज्यों, दूर-दराज के राज्यों और विदेशों की खबरों की सूची बनाइए और देखिए कि कुल खबरों में कितनी स्थानीय, कितनी पास-पड़ोस के राज्यों की और कितनी खबरें विदेशों की हैं? क्या अखबार स्थानीय खबरों को ज़्यादा प्राथमिकता देते हैं? स्थानीय खबरों और विदेशी खबरों का अनुपात क्या है? क्या आपको समाचारपत्र में विदेशों की और खबरें लगता है कि समाचारपत्र में आपके आसपास के ज़िलों, शहरों या राज्यों की खबरों का अनुपात बढ़ना चाहिए? इस पर अपने शिक्षक और साथी छात्रों के साथ चर्चा कीजिए।

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उत्तर
मैंने एक स्थानीय समाचारपत्र के एक दिन के अंक में प्रकाशित लगभग 50 प्रमुख खबरों का अध्ययन किया। खबरों को उनके स्थान के आधार पर चार भागों में बाँटा।
| खबरों का प्रकार | खबरों की संख्या | प्रतिशत |
| स्थानीय शहर/ज़िले की खबरें | 20 | 40% |
| पड़ोसी राज्यों की खबरें | 10 | 20% |
| दूर-दराज़ के राज्यों की खबरें | 12 | 24% |
| विदेशों की खबरें | 8 | 16% |
| कुल | 50 | 100% |
अध्ययन से पता चलता है कि समाचारपत्र में स्थानीय खबरों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। कुल खबरों में 40% खबरें स्थानीय शहर और ज़िले से संबंधित थीं। इसके बाद दूर-दराज़ के राज्यों की 24%, पड़ोसी राज्यों की 20% और विदेशों की 16% खबरें थीं।
स्थानीय खबरों और विदेशी खबरों का अनुपात 20 : 8, अर्थात 5 : 2 है। इससे स्पष्ट होता है कि स्थानीय खबरों को विदेशी खबरों की तुलना में अधिक स्थान दिया गया है।
मेरे विचार से समाचारपत्र में विदेशों की महत्वपूर्ण खबरें भी होनी चाहिए, क्योंकि उनका हमारे देश और समाज पर प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन स्थानीय और आसपास के जिलों, शहरों तथा राज्यों की खबरों का अनुपात थोड़ा और बढ़ना चाहिए। ऐसी खबरें लोगों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और उन्हें अपने क्षेत्र की समस्याओं, विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और स्थानीय घटनाओं की जानकारी देती हैं।
मैंने इस विषय पर अपने शिक्षक और साथी छात्रों के साथ चर्चा की। चर्चा में यह निष्कर्ष निकला कि एक अच्छे समाचारपत्र में स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों के बीच संतुलन होना चाहिए, लेकिन स्थानीय पाठकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय समाचारों को पर्याप्त प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
