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भाव व शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए – "दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयीदधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी"

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प्रश्न

भाव व शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –

"दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी
दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी"

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

भाव सौंदर्य – प्रस्तुत पंक्तियों में मीराबाई ने दूध की मथनियाँ का उदाहरण देकर यह समझाने का प्रयास किया है। कि जिस प्रकार दही को मथने से घी ऊपर आ जाता है, अलग हो जाता है, उसी प्रकार जीवन का मंथन करने से कृष्ण-प्रेम को ही मैंने सार-तत्व के रूप में अपना लिया है। शेष संसार छाछ की भाँति सारहीन है। इन में मीरा के मन का मंथन और जीवन जीने की सुंदर शैली का चित्रण किया गया है। संसार के प्रति वैराग्य भाव है।

शिल्प सौंदर्य – अन्योक्ति अलंकार है। यहाँ दही जीवन का प्रतीक है। प्रतीकात्मकता है- ‘घृत’ भक्ति का, ‘छोयी’ असार संसार का प्रतीक है। ब्रजभाषा है। गेयता है। तत्सम शब्दावली भी है।

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मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई
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अध्याय 2.02: मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई - अभ्यास [पृष्ठ १३८]

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एनसीईआरटी Hindi Aaroh bhag 1 Class 11
अध्याय 2.02 मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
अभ्यास | Q 2. (ख) | पृष्ठ १३८
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