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प्रश्न
अपने स्थानीय अखबार में ‘संपादक के नाम पत्र’ कॉलम के लिए चार सप्ताहों तक हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर एक-एक पत्र भेजिए। पत्रों के शब्द संख्या 50 से 75 शब्दों से अधिक नहीं हो। पहले सप्ताह संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित किसी संपादकीय या लेख में उठाए गए मुद्दे पर अपनी राय भेजिए। अगले सप्ताह अपने शहर की किसी सार्वजनिक समस्या पर पत्र भेजिए। तीसरे सप्ताह मुहल्ले की किसी समस्या पर पत्र भेजिए और आखिरी पत्र में अपने स्कूल से जुड़ी किसी समस्या का ब्योरा देते हुए चिट्ठी भेजिए। समाचारपत्र में पत्र स्तंभ को ध्यान से पढ़िए। क्या आपका पत्र प्रकाशित हुआ?

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उत्तर
संपादकीय पर प्रतिक्रिया
प्लास्टिक प्रदूषण पर प्रभावी रोक जरूरी
महोदय,
आपके समाचारपत्र के संपादकीय पृष्ठ पर प्लास्टिक प्रदूषण के संबंध में प्रकाशित लेख अत्यंत विचारणीय था। प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। सरकार के साथ नागरिकों को भी इसकी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कपड़े और कागज के थैलों का प्रयोग बढ़ाया जाना चाहिए तथा प्लास्टिक के कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित होना चाहिए।
भवदीय
एक जागरूक नागरिक
शहर की समस्या
शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने की आवश्यकता
महोदय,
हमारे शहर में बढ़ते यातायात के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनती है। मुख्य मार्गों पर अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे अतिक्रमण से समस्या और गंभीर हो जाती है। इससे विद्यार्थियों, कर्मचारियों और बुजुर्गों को विशेष परेशानी होती है। संबंधित विभाग को अवैध पार्किंग पर कार्रवाई, अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
भवदीय
एक शहरवासी
मुहल्ले की समस्या
मुहल्ले में नियमित सफाई की आवश्यकता
महोदय,
हमारे मुहल्ले में पिछले कुछ समय से सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं और नालियों की नियमित सफाई नहीं होती। इससे दुर्गंध और गंदगी फैलती है। स्थानीय लोगों को भी कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालना चाहिए। नगर निकाय से अनुरोध है कि नियमित सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
भवदीय
एक स्थानीय निवासी
स्कूल की समस्या
विद्यालय में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था
महोदय,
हमारे विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। गर्मी के दिनों में पानी के लिए विद्यार्थियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। इससे विशेष रूप से छोटे बच्चों को परेशानी होती है। विद्यालय प्रशासन को अतिरिक्त पानी के कूलर लगाने तथा उनकी नियमित सफाई की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि सभी विद्यार्थियों को पर्याप्त स्वच्छ पानी मिल सके।
भवदीय
एक विद्यार्थी
