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प्रश्न
आधुनिक कवयित्रियों द्वारा अपनी रचनाओं में जिन सामाजिक समस्याओं को उठाया गया है उनमें से किन्हीं पाँच समस्याओं का उल्लेख करें।
विस्तार में उत्तर
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उत्तर
आधुनिक कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं में पितृसत्तात्मक समाज, लैंगिक भेदभाव, नारी-शोषण, सामाजिक रूढ़ियों और स्वतंत्रता की कमी जैसे ज्वलंत विषयों को प्रमुखता से उठाया है। उनकी कविताओं में मुखरित हुई किन्हीं पाँच प्रमुख सामाजिक समस्याओं का विवरण इस प्रकार है:
- पितृसत्तात्मक मानसिकता और लैंगिक असमानता: कवयित्रियों ने घर और समाज में पुरुषों की प्रधानता और महिलाओं को दोयम दर्जे का मानने वाली सोच का विरोध किया है।
- नारी-उत्पीड़न और घरेलू हिंसा: महिलाओं पर होने वाले शारीरिक और मानसिक अत्याचार, तथा उनके दमित जीवन की पीड़ा को कविताओं में सशक्त आवाज़ दी गई है।
- सामाजिक रूढ़ियाँ और परंपराएँ: सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी परंपराओं, जो महिलाओं के विकास और स्वतंत्रता में बाधा बनती हैं, पर तीखे प्रहार किए गए हैं।
- व्यक्तित्व और पहचान का संकट: महिलाओं के अपने अस्तित्व, अधिकारों और स्वतंत्र पहचान (केवल माँ, पत्नी या बेटी के रूप में सीमित न रहकर) को लेकर संघर्ष को दर्शाया गया है।
- आर्थिक और सामाजिक परतंत्रता: महिलाओं की आर्थिक निर्भरता और शिक्षा के अभाव जैसी समस्याओं को उठाया गया है, जो उन्हें समाज में कमजोर बनाती हैं।
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