Advertisements
Advertisements
चित्रकथा-पट्ट आपने देखा कि हेलेन होप आदिवासियों की कहानी पर एक फिल्म बनाना चाहती है। क्या आदिवासियों के बारे में एक कहानी बना कर उसकी मदद कर सकते हैं?
Concept: undefined >> undefined
सी.के. जानू और अन्य आदिवासी कार्यकर्ताओं को ऐसा क्यों लगता है कि आदिवासी भी अपने परंपरागत संसाधनों के छीने जाने के खिलाफ़ 1989 के इस कानून का इस्तेमाल कर सकते हैं? इस कानून के प्रावधानों में ऐसा क्या खास है जो उनकी मान्यता को पुष्ट करता है?
Concept: undefined >> undefined
Advertisements
हमारे देश में निजी शैक्षणिक संस्थान - स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, तकनीकी और व्यावसायिक, प्रशिक्षण संस्थान - बड़े पैमाने पर खुलतें जा रहे हैं। दूसरी तरफ सरकारी शिक्षा संस्थानों का महत्त्व कम होता जा रहा है। आपकी राय में इसका क्या असर हो सकता है? चर्चा कीजिए।
Concept: undefined >> undefined
इस इकाई में आपने सरकार की विभिन्न भूमिकाओं के बारे में पढ़ा है। इनके बारे में एक अनुच्छेद लिखें।
Concept: undefined >> undefined
पहले पर्यावरण को किस तरह देखा जाता था? क्या अब सोच में कोई बदलाव आया है? चर्चा करें।
Concept: undefined >> undefined
प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण इस कार्टून के जरिए क्या कहना चाह रहे हैं? इसका 2006 में बनाए गए इस कानून से क्या संबंध है जिसको पृष्ठ 123 पर आपने पढ़ा था।

Concept: undefined >> undefined
क्लास मॉनीटर का चुनाव शिक्षक द्वारा किया जाता है या विद्यार्थियों द्वारा - आपकी राय में इस बात से कोई फर्क पड़ता है या नहीं? चर्चा कीजिए।
Concept: undefined >> undefined
विधायक (एमएलए) कौन होता है और उसका चुनाव कैसे किया जाता है - इस बात को समझाने के लिए ‘निर्वाचन क्षेत्र’ और ‘प्रतिनिधित्व’ शब्दों का प्रयोग करें।
Concept: undefined >> undefined
निम्नलिखित शब्दों को रिक्त स्थानों में भरें-
| सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार | विधायकों | प्रतिनिधियों | प्रत्यक्ष रूप से |
हमारे समय में लोकतांत्रिक सरकारों को आमतौर पर प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र की संज्ञा दी जाती है। प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र में लोग ______ हिस्सेदारी नहीं करते, बल्कि चुनाव प्रक्रिया के जरिए अपने ______ को चुनते हैं। ये ______ पूरी जनता के बारे में मिलकर फैसले लेते हैं। आज के दौर में ऐसी किसी सरकार को लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता जो अपने लोगों को ______ न देती हो। इसका मतलब यह है कि देश के सभी वयस्क नागरिकों को वोट देने का अधिकार होता है।
Concept: undefined >> undefined
आपको संसद में महिलाओं की कम संख्या का क्या कारण समझ में आता है? चर्चा करें।
Concept: undefined >> undefined
फौजदारी और दीवानी कानून के बारे में आप जो समझते हैं उसके आधार पर इस तालिका को भरें:
| उल्लंघन का विवरण | कानून की शाखा | अपनाई जाने वाली प्रक्रिया |
| कुछ लड़के स्कूल जाते वक्त लड़कियों को हर रोज परेशान करते है। | ||
| एक किरायेदार को मकान खाली करने लिए मजबूर किया जा रहा है और वह मकान मालिक के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर देता है। |
Concept: undefined >> undefined
सारे गवाहों के बयान सुनने के बाद न्यायाधीश ने शांति के मुकदमे में क्या कहा?
Concept: undefined >> undefined
- आज के भारत में कौन सी धातुएँ महत्त्वपूर्ण हैं? क्यों?
- वे धातुएँ कहाँ से हासिल होती हैं?
- क्या वहाँ आदिवासियों की आबादी है?
Concept: undefined >> undefined
क्या आप 1989 के कानून के दो प्रावधानों का उल्लेख कर सकते हैं?
Concept: undefined >> undefined
अगर सरकार जलापूर्ति की जिम्मेदारी से हाथ खींच ले तो क्या होगा? क्या आपको लगता है कि यह सही कदम होगा?
Concept: undefined >> undefined
‘स्वच्छ वातावरण एक जनसुविधा है’, क्या आप इस बयान की व्याख्या कर सकते हैं?
Concept: undefined >> undefined
हमें नए कानूनों की जरूरत क्यों है?
Concept: undefined >> undefined
कंपनियाँ और ठेकेदार पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन कैसे कर पाते हैं?
Concept: undefined >> undefined
जनसुविधा के रूप में पर्यावरण
हाल के वर्षों में न्यायालयों ने पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर कई कड़े आदेश दिए हैं। ऐसे कई आदेशों से लोगों की रोजी-रोटी पर भी बुरा असर पड़ा है।
मिसाल के तौर पर, अदालत ने आदेश दिया कि दिल्ली के रिहायशी इलाकों में काम करने वाले उद्योगों को बंद कर दिया जाए या उन्हें शहर से बाहर दूसरे इलाकों में भेज दिया जाए। इनमें से कई कारखाने आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रहे थे। इन कारखानों की गंदगी से यमुना नदी भी प्रदूषित हो रही थी, क्योंकि इन कारखानों को नियमों के हिसाब से नहीं चलाया जा रहा था।
अदालत की कार्रवाई से एक समस्या तो हल हो गई, लेकिन एक नई समस्या पैदा भी हो गईं कारखानों के बंद हो जाने से बहुत सारे मज़दूरों के रोजगार खत्म हो गए। बहुतों को दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ा। जहाँ उन कारखानों को दोबारा चालू किया गया था। अब प्रदूषण की समस्या इन नए इलाकों में पैदा हो रही है ये इलाके प्रदूषित होने लगे हैं। मजदूरों की सुरक्षा संबंधी स्थितियों का मुद्दा अभी भी वैसा का वैसा है।
भारत में पर्यावरणीय मुद्दों पर हुए ताज़ा अनुसंधानों से यह बात सामने आई है कि मध्य वर्ग के लोग पर्यावरण की चिंता तो करने लगे हैं, लेकिन वे अक्सर गरीबों की पीड़ा को ध्यान में नहीं रखते। इसलिए उनमें से बहुतों को यह तो समझ में आता है कि शहर को सुंदर बनाने के वास्ते बस्तियों को हटाना चाहिए या प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को शहर के बाहर ले जाना चाहिए, लेकिन यह समझ में नहीं आता कि इससे बहुत सारे लोगों की रोजी-रोटी भी खतरे में पड़ सकती है। जहाँ एक तरफ स्वच्छ पर्यावरण के बारे में जागरूकता बढ़ रही है वहीं दूसरी तरफ मजदूरों की सुरक्षा के बारे में लोग ज्यादा चिंता नहीं जता रहे हैं।
अब चुनौती ऐसे समाधान ढूंढने की है, जिनमें स्वच्छ वातावरण का लाभ सभी को मिल सके। इसका एक तरीका यह है कि हम कारखानों में ज्यादा स्वच्छ तकनीकों और प्रक्रियाओं को अपनाने पर जोर दें। इसके लिए सरकार को भी चाहिए कि वह कारखानों को प्रोत्साहन और मदद दे। उसे प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना करना होगा। इस तरह मजदूरों के रोजगार भी बच जाएँगे और समुदायों व मजदूरों को सुरक्षित पर्यावरण का अधिकार भी मिल जाएगा।
क्या आपको लगता है कि ऊपर उद्धत मामले में सभी पक्षों को न्याय मिला है?
Concept: undefined >> undefined

