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HSC Commerce (English Medium) 12th Standard Board Exam - Maharashtra State Board Important Questions for Hindi

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Hindi
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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: 

‘‘वे मुझे बर्दाश्त नहीं कर सकते, यदि मुझपर हँसें नहीं। मेरी मानसिक और नैतिक महत्ता लोगों के लिए असहनीय है। उन्हें उबाने वाली खूबियों का पुंज लोगों के गले के नीचे कैसे उतरे? इसलिए मेरे नागरिक बंधु या तो कान पर उँगली रख लेते हैं या बेवकूफी से भरी हँसी के अंबार के नीचे ढँक देते हैं मेरी बात।’’ शॉ के इन शब्दों में अहंकार की पैनी धार है, यह कहकर हम इन शब्दों की उपेक्षा नहीं कर सकते क्योंकि इनमें संसार का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण सत्य कह दिया गया है।

संसार में पाप है, जीवन में दोष, व्यवस्था में अन्याय है, व्यवहार में अत्याचार... और इस तरह समाज पीड़ित और पीड़क वर्गों में बँट गया है। सुधारक आते हैं, जीवन की इन विडंबनाओं पर घनघोर चोट करते हैं। विडंबनाएँ टूटती-बिखरती नजर आती हैं पर हम देखते हैं कि सुधारक चले जाते हैं और विडंबनाएँ अपना काम करती रहती हैं।

आखिर इसका रहस्य क्या है कि संसार में इतने महान पुरुष, सुधारक, तीर्थंकर, अवतार, संत और पैगंबर आ चुके पर यह संसार अभी तक वैसा-का-वैसा ही चल रहा है।

(१) आकृति पूर्ण कीजिए: (२)

  1. संसार में - 
  2. जीवन में - 
  3. व्यवस्था में - 
  4. व्यवहार में -

(२) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए: (२)

  1. ढेर -
  2. धारदार - 
  3. शोषक -
  4. उपहास -

(३) ‘समाजसेवा ही ईश्वरसेवा है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [6] पाप के चार हथियार
Concept: पाप के चार हथियार

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

सुधारक होता है करुणाशील और उसका सत्य सरल विश्वासी। वह पहले चौंकता है, फिर कोमल पड़ जाता है और तब उसका वेग बन जाता है शांत और वातावरण में छा जाती है सुकुमारता।

पाप अभी तक सुधारक और सत्य के जो स्तोत्र पढ़ता जा रहा था, उनका करता है यूँ उपसंहार "सुधारक महान है, वह लोकोत्तर है, मानव नहीं, वह तो भगवान है, तीर्थंकर है, अवतार है, पैगंबर है, संत है। उसकी वाणी में जो सत्य है, वह स्वर्ग का अमृत है। वह हमारा वंदनीय है, स्मरणीय है, पर हम पृथ्वी के साधारण मनुष्यों के लिए वैसा बनना असंभव है, उस सत्य को जीवन में उतारना हमारा आदर्श है, पर आदर्श को कब, कहाँ, कौन पा सकता है?’’ और इसके बाद उसका नारा हो जाता है, "महाप्रभु सुधारक वंदनीय है, उसका सत्य महान है, वह लोकोत्तर है।"

यह नारा ऊँचा उठता रहता है, अधिक-से-अधिक दूर तक उसकी गूँज फैलती रहती है, लोग उसमें शामिल होते रहते हैं। पर अब सबका ध्यान सुधारक में नहीं; उसकी लोकोत्तरता में समाया रहता है, सुधारक के सत्य में नहीं, उसके सूक्ष्म-से-सूक्ष्म अर्थों और फलितार्थों के करने में जुटा रहता है। 

अब सुधारक के बनने लगते हैं स्मारक और मंदिर और सत्य के ग्रंथ और भाष्य। बस यहीं सुधारक और उसके सत्य की पराजय पूरी तरह हो जाती है।

पाप का यह ब्रह्मास्त्र अतीत में अजेय रहा है और वर्तमान में भी अजेय है। कौन कह सकता है कि भविष्य में कभी कोई इसकी अजेयता को खंडित कर सकेगा या नहीं?

  1. संजाल पूर्ण कीजिए:      [2]
     पाप के अनुसार सुधारक यह है;
     
     
     
     
  2.  निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए:         [2]
      1. पुण्य - 
      2. विष - 
      3. असत्य - 
      4. जय - 
  3. किसी एक समाज सुधारक के बारे में अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।   [2]    
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Chapter: [6] पाप के चार हथियार
Concept: पाप के चार हथियार

डॉ. मुकेश गौतम जी की रचनाएँ लिखिए।

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Chapter: [7] पेड़ होने का अर्थ (पद्य)
Concept: पेड़ होने का अर्थ

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

अंकुरित होने से ठूँठ हो जाने तक
आँधी-तूफान हो या कोई प्रतापी राजा-महाराजा
पेड़ किसी के पाँव नहीं पड़ता है,
जब तक है उसमें साँस
एक जगह पर खड़े रहकर
हालात से लड़ता है!

जहाँ भी खड़ा हो
सड़क, झील या कोई पहाड़
भेड़िया, बाघ, शेर की दहाड़
पेड़ किसी से नहीं डरता है!

हत्या या आत्महत्या नहीं करता है पेड़।
थके राहगीर को देकर छाँव व ठंडी हवा
राह में गिरा देता है फूल
और करता है इशारा उसे आगे बढ़ने का।

पेड़ करता है सभी का स्वागत,
देता है सभी को विदाई!

(१) आकृति पूर्ण कीजिए: (२)

(२) निम्नलिखित शब्दों के वचन पद्यांश में से ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. आँधियाँ - ______
  2. साँसें - ______
  3. सड़कें - ______
  4. हवाएँ - ______

(३) ‘पेड़ मनुष्य को प्रेरणा देता है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [7] पेड़ होने का अर्थ (पद्य)
Concept: पेड़ होने का अर्थ

निम्नलिखित पद्वांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

हमारी साँसों के लिए शुद्ध हवा
बीमारी के लिए दवा
शवयात्रा, शगुन या बारात
सभी के लिए देता है पुष्पों की सौगात
आदिकाल से आज तक
सुबह-शाम, दिन-रात
हमेशा देता आया है मनुष्य का साथ
कवि को मिला कागज, कलम, स्याही
वैद, हकीम को दवाई
शासन या प्रशासन
सभी के बैठने के लिए
कुर्सी, मेज, आसन
जो हम उपयोग नहीं करें
वृक्ष के पास ऐसी एक भी नहीं चीज है।
  1. कृति पूर्ण कीजिए:        [2]

  2. निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए:         [2]
    1. बीमारियाँ  - ______
    2. दवाई - ______
    3. कुर्सियाँ - ______
    4. चीज़ - ______
  3. “पेड़ हमारा दाता है" इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।      [2]
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Chapter: [7] पेड़ होने का अर्थ (पद्य)
Concept: पेड़ होने का अर्थ

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

          बदले वक्त के साथ बदलते समय के नये मूल्यों को भी पहचानकर हमें अपनाना है पर यहाँ ‘पहचान’ शब्द को रेखांकित करो। बिना समझे, बिना पहचाने कुछ भी नया अपनाने से लाभ के बजाय हानि उठानी पड़ सकती है।

          पश्चिमी दुनिया का हर मूल्य हमारे लिए नये मूल्य का पर्याय नहीं हो सकता। हमारे बहुत-से पुराने मूल्य अब इतने टूट-फूट गए हैं कि उन्हें भी जैसे-तैसे जोड़कर खड़ा करने का मतलब होगा, अपने आधार को कमजोर करना। या यूँ भी कह सकते हैं कि अपनी अच्छी परंपराओं को रूढ़ि में ढालना।

          समय के साथ अपना अर्थ खो चुकी या वर्तमान प्रगतिशील समाज को पीछे ले जाने वाली समाज की कोई भी रीति-नीति रूढ़ि है, समय के साथ अनुपयोगी हो गए मूल्यों को छोड़ती और उपयोगी मूल्यों को जोड़ती निरंतर बहती धारा परंपरा है, जो रूढ़ि की तरह स्थिर नहीं हो सकती।

           यही अंतर है दोनों में। रूढ़ि स्थिर है, परंपरा निरंतर गतिशील। एक निरंतर बहता निर्मल प्रवाह, जो हर सड़ी-गली रूढ़ि को किनारे फेंकता और हर भीतरी-बाहरी, देशी-विदेशी उपयोगी मूल्य को अपने में समेटता चलता है। इसीलिए मैंने पहले कहा है कि अपने टूटे-फूटे मूल्यों को भरसक जोड़कर खड़ा करने से कोई लाभ नहीं, आज नहीं तो कल, वे जर्जर मूल्य भरहराकर गिरेंगे ही।

(१) कारण लिखिए: (२)

  1. बदले वक्‍त के साथ नए मूल्यों को पहचानकर हमें अपनाना है
  2. अपने टूटे-फूटे मूल्यों को भरसक जोड़कर खड़ा करने से कोई नहीं है

(२) उपर्युक्त गद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए: (२)

(१)  
(२)  
(३)  
(४)  

(३) ‘बदलते समय के साथ हमारे मूल्यों में भी परिवर्तन आवश्यक है’ इस विषय पर अपना मत ४० से ५० शब्दों में स्पष्ट कीजिए। (२)

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Chapter: [8] सुनो किशोरी
Concept: सुनो किशोरी

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

           सुनो सुगंधा! तुम्हारा पत्र पाकर खुशी हुई। तुमने दोतरफा अधिकार की बात उठाई है, वह पसंद आई। बेशक, जहाँ जिस बात से तुम्हारी असहमति हो; वहाँ तुम्हें अपनी बात मुझे समझाने का पूरा अधिकार है। मुझे खुशी ही होगी तुम्हारे इस अधिकार प्रयोग पर। इससे राह खुलेगी और खुलती ही जाएगी। जहाँ कहीं कुछ रुकती दिखाई देगी; वहाँ भी परस्पर आदान-प्रदान से राह निकाल ली जाएगी। अपनी-अपनी बात कहने-सुनने में बंधन या संकोच कैसा?

           मैंने तो अधिकार की बात यों पूछी थी कि मैं उस बेटी की माँ हूँ जो जीवन में ऊँचा उठने के लिए बड़े ऊँचे सपने देखा करती है; आकाश में अपने छोटे-छोटे डैनों को चौड़े फैलाकर।

           धरती से बहुत ऊँचाई में फैले इन डैनों को यथार्थ से दूर समझकर भी मैं काटना नहीं चाहती। केवल उनकी डोर मजबूत करना चाहती हूँ कि अपनी किसी ऊँची उड़ान में वे लड़खड़ा न जाएँ। इसलिए कहना चाहती हूँ कि ‘उड़ो बेटी, उड़ो, पर धरती पर निगाह रखकर।’ कहीं ऐसा न हो कि धरती से जुड़ी डोर कट जाए और किसी अनजाने-अवांछित स्थल पर गिरकर डैने क्षत-विक्षत हो जाएँ। ऐसा नहीं होगा क्योंकि तुम एक समझदार लड़की हो। फिर भी सावधानी तो अपेक्षित है ही।

           यह सावधानी का ही संकेत है कि निगाह धरती पर रखकर उड़ान भरी जाए। उस धरती पर जो तुम्हारा आधार है- उसमें तुम्हारे परिवेश का, तुम्हारे संस्कार का, तुम्हारी सांस्कृतिक परंपरा का, तुम्हारी सामर्थ्य का भी आधार जुड़ा होना चाहिए। हमें पुरानी-जर्जर रूढ़ियों को तोड़ना है, अच्छी परंपराओं को नहीं।

(१) आकृति पूर्ण कीजिए: (२)

(२) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. आनंद - 
  2. नभ -
  3. पुत्री -
  4. सजगता - 

(३) ‘वर्तमान पीढ़ी के युवक-युवतियों का जीवन के प्रति बदला दृष्टिकोण’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ३० शब्दों में स्पष्ट लिखिए। (२)

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Chapter: [8] सुनो किशोरी
Concept: सुनो किशोरी

कैलाश सेंगर जी की प्रसिद्ध रचनाओं के नाम - ______

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Chapter: [9] चुनिंदा शेर (पद्य)
Concept: चुनिंदा शेर

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

गजलों से खुशबू बिखराना हमको आता है।
चट्टानों पर फूल खिलाना हमको आता है।

परिंदों को शिकायत है, कभी तो सुन मेरे मालिक।
तेरे दानों में भी शायद, लगा है घुन मेरे मालिक।

हम जिंदगी के चंद सवालों में खो गए।
सारे जवाब उनके उजालों में खो गए।

चट्टानी रातों को जुगनू से वह सँवारा करती है।
बरसों से इक सुबह हमारा नाम पुकारा करती है।

(१) कृति पूर्ण कीजिए: (२)

(१) उत्तर लिखिए: (१)

  • परिंदों को यह शिकायत है:

(२) परिणाम लिखिए: (१)

  • हम जिंदगी के चंद सवालों में खो गए:

(२) उपर्युक्त पद्यांश में आए हुए हिंदी शब्दों के उर्दू शब्द लिखिए: (२)

  1. पक्षी - ______
  2. सपना - ______
  3. प्रश्न - ______
  4. उत्तर - ______

(३) ‘व्यक्ति को अपने जीवन में हमेशा कर्मरत रहना चाहिए’ इस कथन के संबंध में अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [9] चुनिंदा शेर (पद्य)
Concept: चुनिंदा शेर

आम आदमी की पीड़ा को समझते हुए ‘चुनिंदा शेर’ कविता का रसास्वादन कीजिए।

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Chapter: [9] चुनिंदा शेर (पद्य)
Concept: चुनिंदा शेर

मौसी की स्वभावगत विशेषताएँ लिखिए।

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Chapter: [11] कोखजाया
Concept: कोखजाया

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए।

‘मनुष्य के स्वार्थ के कारण रिश्तों में आई दूरी’, ‘कोखजाया’ इस पाठ के आधार पर अपना मंतव्य लिखिए।

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Chapter: [11] कोखजाया
Concept: कोखजाया

निम्नलिखित प्रश्न का मात्र एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

लेख विधा की विशेषताएँ लिखिए।

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Chapter: [11] कोखजाया
Concept: कोखजाया

"बसंत और सावन ॠतु जीवन के सौंदर्य का अनुभव कराते हैं।" इस कथन के आधार पर कविता 'सुनु रे सखिया' का रसास्वादन कीजिए।

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Chapter: [12] लोकगीत - सुनु रे सखिया, कजरी (पद्य)
Concept: लोकगीत

लोकगीतों की दो विशेषताएँ लिखिए।

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Chapter: [12] लोकगीत - सुनु रे सखिया, कजरी (पद्य)
Concept: लोकगीत

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

नीचे की घाटी से
ऊपर के शिखरों पर
जिसको जाना था वह चला गया
हाय मुझी पर पग रख
मेरी बाँहों से
इतिहास तुम्हें ले गया!

सुनो कनु, सुनो
क्या मैं सिर्फ एक सेतु थी तुम्हारे लिए
लीलाभूमि और युद्धक्षेत्र के
अलंघ्य अंतराल में!

अब इन सूने शिखरों, मृत्यु घाटियों में बने
सोने के पतले गुँथे तारोंवाले पुल-सा
निर्जन
निरर्थक
काँपता-सा, यहाँ छूट गया-मेरा यह सेतु जिस्म
जिसको जाना था वह चला गया

(१) संजाल पूर्ण कीजिए: (२)

(२) पद्यांश में आए हुए निम्न शब्दों का चयन परिवर्तन कीजिए: (२)

  1. बाँह - ______
  2. सेतु - ______
  3. लीला - ______
  4. घाटी - ______

(३) ‘वृक्ष की उपयोगिता’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ४५ शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
Concept: कनुप्रिया

निम्नलिखित काव्य पंक्तियों को पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

यह आम्रवृक्ष की डाल
उनकी विशेष प्रिय थी
तेरे न आने पर
सारी शाम इसपर टिक
उन्होंने वंशी में बार-बार
तेरा नाम भरकर तुझे टेरा था-

आज यह आम की डाल
सदा-सदा के लिए काट दी जाएगी
क्योंकि कृष्ण के सेनापतियों के
वायुवेगगामी रथों की
गगनचुंबी ध्वजाओं में
यह नीची डाल अटकती है
और यह पथ के किनारे खड़ा
छायादार पावन अशोक वृक्ष

आज खंड-खंड हो जाएगा तो क्या-
यदि ग्रामवासी, सेनाओं के स्वागत में
तोरण नहीं सजाते
तो क्या सारा ग्राम नहीं उजाड़ दिया जाएगा?

(१) कारण लिखिए: (२)

  1. आम्रवृक्ष की डाल सदा के लिए काट दी जाएगी - ______
  2. छायादार अशोक वृक्ष खंड-खंड हो जाएगा - ______

(२) उचित मिलान कीजिए: (२)

(१) वृक्ष टहनी
(२) ग्राम राह
(३) पथ गाँव
(४) डाल पेड़

(३) ‘युद्ध के दुष्परिणाम’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
Concept: कनुप्रिया

निम्नलिखित काव्य पंवितियाँ पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

घाट से आते हुए
कदंब के नीचे खड़े कनु को
ध्यानमग्न देवता समझ, प्रणाम करने
जिस राह से तू लौटती थी बावरी
आज उस राह से न लौट
उजड़े हुए कुंज
रौंदी हुई लताएँ
आकाश पर छाई हुई धूल
क्या तुझे यह नहीं बता रही
कि आज उस राह से
कृष्ण की अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ
युद्ध में भाग लेने जा रही हैं!
आज उस पथ से अलग हटकर खड़ी हो बावरी!
लताकुंज की ओट
छिपा ले अपने आहत प्यार को।
  1. कारण लिखिए:      [2]
    1. राधा को उस राह से ना लौटने के लिए कहा - ______
    2. राधा को पथ से हटकर खड़े होने को कहा - ______
  2. उचित मिलान कीजिए:     [2]
    (१) ध्यानमग्न राधा
    (२) बावरी प्यार
    (३) अक्षौहिणी देवता
    (४) आहत सेनाएँ
  1. "वर्तमान युग में युद्ध नहीं शांति चाहिए" इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।     [2]
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Chapter: [13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
Concept: कनुप्रिया

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

"राधा ने चरम तन्मयता के क्षणों में डूबकर जीवन की सार्थकता पाई है," इस कथन को स्पष्ट कौजिए।

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Chapter: [13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
Concept: कनुप्रिया

पल्लवन की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
Concept: पल्लवन
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