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रिश्ता लिखिए:
अनिता - राघवेंद्र = --------
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रिश्ता लिखिए:
अम्मा - अनिता = --------
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रिश्ता लिखिए:
बच्चे - बाबू जी = ---------
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रिश्ता लिखिए:
बाबू जी - अनिता = ---------
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पाठ में प्रयुक्त एकवचन और बहुवचन शब्दों की सूची बनाइए -
| एकवचन | बहुवचन | ||
| १. | १. | ||
| २. | २. | ||
| ३. | ३. | ||
| ४. | ४. | ||
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कविता में इस अर्थ में आए शब्द लिखिए:
कर्मभूमि - ______
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कविता में इस अर्थ में आए शब्द लिखिए:
अकारण - ______
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कविता में इस अर्थ में आए शब्द लिखिए:
आकाश - ______
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कविता में इस अर्थ में आए शब्द लिखिए:
विश्वास - ______
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कविता की अपनी पसंदीदा चार पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
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पाठों में आए सभी प्रकार के अव्ययों को ढूँढ़कर उनसे प्रत्येक प्रकार के दस-दस वाक्य लिखिए।
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर ही गई सुचनाओ के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी राघवेंद्र पत्नी-बच्चों सहित अपने पैतृक कस्बे में आया हुआ है। नौकरी से छुट्टियाँ न मिल पाने की मजबूरी के चलते वह चाहकर भी हफ्ता-दस दिन से ज्यादा यहाँ नहीं रुक पाता है लेकिन उसकी इच्छा रहती है कि अम्मा-बाबू जी पूरे साल नहीं तो साल में दो-तीन महीने तो उसके साथ मुंबई में जरूर रहें। बच्चों को संयुक्त परिवार मिले, दादा-दादी का भरपूर प्यार मिले। अनिता, उसकी पत्नी भी यही चाहती है। यही सोचकर उन्होंने पाँच कमरों का फ्लैट खरीदा है पर न जाने क्यों अम्मा-बाबू जी वहाँ बहुत कम जाते हैं। साल भर में एकाध बार, वह भी चंद दिनों के लिए। "बाबू जी, आप और अम्मा चार-छह दिनों के लिए नहीं, चार-छह महीनों के लिए आया कीजिए। इतनी जल्दी लौट जाते हैं तो मन कचोटने-सा लगता है।" |
(1) उत्तर लिखिए:
- राघवेंद्र की चाहत - (1)
- ..................
- ..................
- राघवेंद्र की मजबूरी - (1)
- ..................
- ..................
(2)
- निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में से विलोम शब्द ढूँढकर लिखिए: [1]
- अनिच्छा ×
- बेचना ×
- निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानिए: (1)
- पति - ..................
- दादी - ..................
(3) 'संयुक्त परिवार' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजए:
| लाली मेरे लाल की, जित देखों तित लाल। लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल।। कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन माहिं। ऐसे घट में पीव है, दुनिया जानै नाहिं।। जिन ढूँढ़ा तिन पाइवाँ, गहिंर पानी पैठ। जो बौरा डूबन डरा रहा किनारे वैठ।। जो तोको काँटा बुबै, ताहि बोउ तू फूल। तोहि फूल को फूल है, बाको है तिरसूल।। |
- उचित जोड़ियाँ मिलाइए: [2]
'अ' उत्तर 'आ' कस्तूरी ______ परमात्मा काँटा ______ फूल लाल ______ मृग बौरा ______ पानी किनारा - पद्यांश के अंतिम दोहे का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। [2]
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‘सादा जीवन, उच्च विचार’ विषय पर अपने विचार लिखिए।
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निम्नलिखित पठित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| 'एक बार एक बहुरूपिये ने साधु का रूप बनाया - सिर पर जटाएँ, नंगे शरीर पर भस्म, माथे पर त्रिपुंड, कमर में लँगोटी। उसके रूप में कहीं कोई कसर नहीं थी और यह संसारत्यागी साधु ही लगता था। उसने नगर से बाहर बड़े-से पेड़ के नीचे अपनी झोंपड़ी तैयार की, बगीचा लगाया और बैठकर तपस्या करने लगा। थीरे-धीरे सारे नगर में यह/समाचार फैलने लगा कि बाहर एक बहुत पहुँचे हुए महात्मा ने आकर डेरा लगाया है। लोग उसके दर्शनों को आने लगे और धीरे-धीरे चारों तरफ साधु का यश फैल गया। सारें दिन उसके यहाँ भीड़ लगी रहती थी। लोग कहते थे कि महात्मा जी के उपदेशों में जादू है और उनके आशीर्वाद से संसार के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं। अपनी इस कीर्ति से साधु को कभी-कभी बड़ा आश्चर्य होता और मन-ही-मन वह अपनी सफलता पर मुसकराया करता। |
उत्तर लिखिए:
(1) बहुरूपिये का साधु रूप ऐसा था: (2)
- माथे पर ______
- सिर पर ______
- नंगे शरीर पर ______
- कमर में ______
(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के विलोमार्थक शब्द गद्यांश में से ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- महल × ______
- असफलता × ______
(ii) निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए: (1)
- डेरा - ______
- लँगोटी - ______
(3) 'हमें अपने व्यवसाय के प्रति ईमानदार होना चाहिए' 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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निम्नलिखित पठित पदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
धूरि भरे अति सोहत स्याम जू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी। सोहत है चँँदवा सिर मोर को, तैसिय सुंदर पाग कसी है। |
(1) आकृति में लिखिए: (1)
(i)

(ii) कृष्ण ने पहने हैं - (1)
- पग में - ______
- सुंदर कसी हुई - ______
(2) पद्यांश की प्रथम दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया है। जोड़े में खंखड़-सा हो जाता है और कभी-कभी डर लगता है कि यह सूख तो नहीं रहा है, लेकिन वसंत आते ही इसके भीतर सोई ऊर्जा जागने लगती है, प्राणरस छलकने लगता है और क्रमश: नई टहनियों तथा नये पत्तों के सौंदर्य से लद जाता है। मैं उसे देख रहा हूँ और लगता है, अब इसमें फूल आया, तब इसमें फूल आया। हाँ, यह हरसिंगार बहुत मस्त है। आषाढ़ में हलकी-हलकी हँसी उसमें फूटने लगती है, फिर शरद में तो कहना ही क्या! तारों भरा आसमान बन जाता है। रात भर जगमग-जंगमंग करता रहता है और सुबह को अनंत फूलों के रूपमें धरती पर बिछ जाता है। रात भर उसकी महक घर में टहलती रहती है। |
(1) कृति पूर्ण कौजिए: (2)
हरसिंगार में होने वाले बदलाव
- वसंत ऋतु में ______
- वर्षा ऋतु में ______
(2) (i) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए: (1)
ऊर्जा जागने लगती है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- पुरानी × ______
- दिन × ______
(3) “प्रकृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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