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बरषहिं जलद पाठ से प्रस्तुत पद्यांश से अपनी पसंद की किन्हीं चार पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
कबहुँ प्रबल बह मारुत, जहँ-तहँ मेघ बिलाहिं ।
जिमि कपूत के उपजे, कुल सद्धर्म नसाहिं ।।
कबहुँ दिवस महँ निबिड़ तम, कबहुँक प्रगट पतंग ।
बिनसइ-उपजइ ग्यान जिमि, पाइ कुसंग-सुसंग ।।
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संजाल पूर्ण कीजिए :

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उत्तर लिखिए :

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कृति पूर्ण कीजिए :

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उत्तर लिखिए :
व्यापारी और उद्योगपतियों के लिए अर्थशास्त्र द्वारा बनाए गए नये नियम - ______
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उत्तर लिखिए :
संपत्ति के दो मुख्य साधन
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उत्तर लिखिए :
समाप्त हुईं दो प्रथाएँ - ______
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उत्तर लिखिए :
कल्याणकारी राज्य का अर्थ - ______
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तुलना कीजिए :
| बुद्धिजीवी | श्रमजीवी |
| १. | १. |
| २. | २. |
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‘समाज परोपकार वृत्ति के बल पर ही ऊँचा उठ सकता है’, इस कथन से संबंधित अपने विचार लिखिए।
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अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
बहुत अच्छी बात है, निकलवा लीजिए
पर जिनके घर में बैठने को कुछ भी नहीं
उनके यहाँ कम-से-कम
एक तख्त तो डलवा दीजिए ।
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कृति पूर्ण कीजिए :
कवि द्वारा छापामारों को दिए गए सुझाव
- ______
- ______
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कृति पूर्ण कीजिए :
शयनकक्ष में पाई गई चीज
- ______
- ______
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कविता के आधार पर जोड़ियाँ मिलाइए :
| अ | आ |
| अर्थ | बालों में |
| सुवर्ण | चेहरे पर |
| चाँदी | नई कविता में |
| मुद्रा | काव्य कृतियों में |
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