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कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
निरंकुश - ______
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कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
स्वतंत्र - ______
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कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
हित चाहने वाले - ______
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कविता (हिम) में आए प्राकृतिक घटक :

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विशेषताएँ लिखिए :
वृक्ष - ______
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विशेषताएँ लिखिए :
प्रशांतता - ______
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विशेषताएँ लिखिए :
पाखीदल का समूह - ______
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विशेषताएँ लिखिए :
नदियाँ - ______
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विशेषताएँ लिखिए :
हवा - ______
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विशेषताएँ लिखिए :
झरने - ______
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कविता (हिम) की अंतिम छह पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
घाटी या कि नदी में
गिर सकने वाली वे
पर्वत थामे चली जा रहीं
पगवाटें भी छूट गईं
सब छूट गईं
जैसे सांसारिकताएँ थीं ये भी।
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निम्न मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए :
१. रचनाकार का नाम
२. रचना का प्रकार
३. पसंदीदा पंक्ति
४. पसंद होने का कारण
५. रचना से प्राप्त प्रेरणा
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कृति कीजिए :
मल्लिका ने बारिश में किए अनुभव :

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‘बारिश में भीगने के अपने अनुभव’ पर पाँच -छह पंक्तियाँ लिखिए।
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प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए :
| कृष्ण विरह में राधा की स्थिति |
| ↓ |
| ↓ |
| ↓ |
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दूसरे पद का सरल अर्थ लिखिए |
प्रीति करि काहू सुख न लह्यौ।
प्रीति पतंग करी पावक सौं, आपै प्रान दह्यौ।।
अलिसुत प्रीति करी जलसुत सौं, संपुट मांझ गह्यौ।
सारंग प्रीति करी जु नाद सौं, सन्मुख बान सह्यौ।।
हम जो प्रीति करी माधव सों, चलत न कछू कह्यौ।
सूरदास प्रभु बिनु दुख पावत, नैननि नीर बह्यौ।।
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