Advertisements
Advertisements
प्रश्न
'यह अद्वितीय-यह मेरा-यह मैं स्वयं विसर्जित'- पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।
Advertisements
उत्तर
जब व्यष्टि का समष्टि में विसर्जन होता है, तब उसकी उपयोगिता बढ़ जाती है। प्रत्येक व्यक्ति सभी गुणों से युक्त है लेकिन समाज में उसका विलय नहीं है, तो वह अकेला होगा। अकेला वह अपने गुणों का लाभ न स्वयं उठा पाएगा और न किसी अन्य का भला कर पाएगा। जब वह समाज के साथ जुड़ जाता है, तब उसके गुणों का सही लाभ उठाया जा सकता है। अपने गुणों से वह समाज का कल्याण करता है। इस तरह वह अपने साथ-साथ समाज का भी सही मार्गदर्शन करता है। समाज का विकास होता है और समाज में एकता स्थापित होती है। तभी कवि ने कहा है कि दीप का पंक्ति में विलय होना अर्थात एक व्यक्ति का समाज में विलय होना है। समाज में विलय होने से वह स्वयं के व्यक्तित्व को विशालता प्रदान करता है। वह अकेले बहुत कुछ कर सकने की हिम्मत रखता है। जब वह स्वयं को समाज में मिला लेता है, तो वह समाज को मज़बूत कर देता है। इससे हमारे राष्ट्र को मज़बूती मिलती है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?
यह दीप अकेला है 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो' के आधार पर व्यष्टि का समिष्ट में विलय क्यों और कैसे संभव है?
'गीत' और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?
'यह मधु है ....... तकता निर्भय'- पंक्तियों के आधार पर बताइए कि 'मधु', 'गोरस' और 'अंकुर' को क्या विशेषता हैं?
भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'यह प्रकृत, स्वयंभू ......... शक्ति को दे दो।'
भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक .......... चिर-अखंड अपनापा।'
'जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो।'
'यह दीप अकेला' एक प्रयोगवादी कविता है। इस कविता के आधार पर 'लघु मानव' के अस्तित्व और महत्व पर प्रकाश डालिए।
