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भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-'यह प्रकृत, स्वयंभू ............. शक्ति को दे दो।'

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प्रश्न

भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'यह प्रकृत, स्वयंभू  ......... शक्ति को दे दो।'

टीपा लिहा
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उत्तर

कविता में प्रकृत, स्वयंभू और ब्रह्मा संज्ञाएँ अंकुर (बीज) को दी गई हैं। अंकुर धरती से बाहर आने के लिए स्वयं ही प्रयास करता है। वह धरती का सीना चीरकर स्वयं बाहर आ जाता है। सूर्य की ओर देखने से वह डरता नहीं है। निडरता से उसे देखता है। इस तरह कवि के अनुसार कवि भी गीतों का निर्माण स्वयं करता है। उनका गान निर्भयता से करता है। कवि चाहता है कि उसे में अन्य के समान सम्मान दिया जाना चाहिए।

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यह दीप अकेला
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.03: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १९]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 1.03 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 6. (क) | पृष्ठ १९

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भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

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