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प्रश्न
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितान् कोष्ठकान् यथायोग्यपदैः पूरयत –
यथा- जन
| जने | जन्योः | जनेषु |
क्षमा
| ______ | ______ | ______ |
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उत्तर
क्षमा
| क्षमायाम् | क्षमायोः | क्षमासु |
संबंधित प्रश्न
सार्थक पदं लिखत –
| कः | शि | क्ष |
उदाहरणानुसारं सार्थक पदं लिखत –
| वा | रः | न |
उदाहरणानुसारं सार्थक पदं लिखत –
| क | दा | चि | त |
उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
तत्र ताः ______ कुर्वन्ति। (व्यायाम)
तृतीया-बहुवचनशब्दानां रचनां कुरुत –

अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| श्रमिकः | ||
| श्रमिकाय | श्रमिका | श्रमिकाभ्याम् |
| जन: | ||
| ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| लता | ||
| लतायै | लताभ्याम् | लताभ्यः |
| शाखा | ||
| ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकप्रदत्तपदैः सह उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
स्व ______ किं किं कुरुते मानवः।(प्रसन्नता)
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| पत्त्रं | ||
| पत्राय | पत्रेभ्याम् | पत्रेभ्यः |
| फलम् | ||
| ______ | ______ | ______ |
चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि स्थूलरेखया चिह्नतानि कुरुत पृथक्तया लिखत च –
ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय।
कोष्ठके प्रदत्तशब्दैः सह उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत।
______ विद्युत् उद्भवति। (जल)
पंचमीविभक्तियुक्तपदं उदाहरणानुसारं चिह्नितं कुरुत –
यथा- काष्ठात् अग्निः जायते मध्यमानात्।
विद्या ददाति विनय
विनयाद् याति पात्रताम्
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति
धनाद् धर्मः ततः सुखम्।
यथोचितं योजयत –
| पिपीलिका | नरात् |
| देव | वृद्धायाः |
| सैनिक | मधुमक्षिकायाः |
| मधुमक्षिका | सैनिकत् |
| वृद्धा | देवात् |
| नर | पिपीलिकायाः |
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते
आयुर्विद्या यशो बलम्।
| अभिवादनशीलस्य | वृद्धोपसेविनः |
| तस्य | |
उदाहरणानुसारं लिखत –
यथा-
| नर | ||
| नरस्य | नर्योः | नराणां |
| क्षमा | ||
| ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
अद्य बाला: चलभाषस्य ______ रताः भवन्ति।
सप्तमीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
न कूपखनन युक्त
प्रदीप्ते वह्निना गृहे।

अधिकरणकारकं सप्तमीविभक्तिं च उपयुज्य प्रदत्तम् उदाहरणाम् अनुसृत्य पञ्च वाक्यानि लिखत।
उदाहरणम् –
1. जले मत्स्याः सन्तरन्ति।
2. लतायां पुष्पाणि सन्ति
चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि स्थूलरेखया चिह्नतानि कुरुत पृथक्तया लिखत च –
खलस्य साधोर्विपरीतमेतत् .
