“............. तुम चाहते हो इस समय मैं यहाँ से चला जाऊँ। मैं चला जाता हूँ। इसलिए नहीं कि तुम आदेश देते हो। परन्तु इसलिए कि तुम आज अतिथि हो, और अतिथि की इच्छा का मान होना चाहिए।” - Hindi (Indian Languages)
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प्रश्न
“............. तुम चाहते हो इस समय मैं यहाँ से चला जाऊँ। मैं चला जाता हूँ। इसलिए नहीं कि तुम आदेश देते हो। परन्तु इसलिए कि तुम आज अतिथि हो, और अतिथि की इच्छा का मान होना चाहिए।”
उक्त कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं? (1)
उक्त कथन का सन्दर्भ स्पष्ट कीजिए। (2)
“अतिथि की इच्छा का मान होना चाहिए।” यह कथन वक्ता ने श्रोता से क्यों कहा? (2)
‘वक्ता दुरदर्शी और वाग्वल है।’ नाटक के आधार पर उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए। (5)
सविस्तर उत्तर
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उत्तर
इस कथन के वक्ता विलोम हैं तथा श्रोता कालिदास और मल्लिका हैं।
एक बार फिर आषाढ़ का प्रथम दिवस आता है और पूर्व की भाँति इस बार भी तेज़ वर्षा हो रही है। इसी वातावरण में कालिदास का प्रवेश होता है। प्रथम अंक में जहाँ कालिदास तेजस्वी और प्रतिभाशाली रूप में दिखाई देता है तथा दूसरे अंक में उसकी कीर्ति और यश की चर्चा होती है, वहीं इस तीसरे अंक में उसके विपरीत एक साधारण, निराश और विषादग्रस्त कालिदास सामने आता है। अब वह कृत्रिम और आडंबरपूर्ण जीवन से ऊब चुका है। शासकीय और वैभवपूर्ण जीवन को त्यागकर वह पुनः अपने वास्तविक कालिदास रूप में लौट आया है। वह अब इसी पर्वतीय प्रदेश में रहकर मल्लिका के साथ जीवन का नया आरंभ करना चाहता है। इस संवाद के दौरान दूरदर्शी वृत्तक बीच-बीच में सक्रिय रहता है, जो मल्लिका को दिखाई नहीं देता। बातचीत करते समय कालिदास एक बार भी यह नहीं सोचता कि उज्जयिनी जाने और लंबे समय तक वहाँ रहने के दौरान मल्लिका को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा और उसके जीवन की दिशा भी बदल सकती थी। तभी अचानक भीतर से बच्ची के रोने की आवाज़ आती है और विलोम के प्रवेश से वास्तविक स्थिति का बोध होता है। कालिदास इस सत्य को स्वीकार नहीं कर पाता और विलोम से वहाँ से चले जाने के लिए कह देता है।
यह कथन वक्ता विलोम ने श्रोता मल्लिका से कहा है। वह कालिदास को केवल ‘अतिथि’ कहकर यह स्पष्ट करना चाहता है कि अब उसका मल्लिका से कोई स्थायी संबंध नहीं रह गया है। वह केवल एक क्षणिक आगंतुक है, कोई स्थायी उपस्थिति नहीं।
विलोम स्वभाव से वाचाल और दूरदर्शी दोनों है। उसके गिर जाने का कारण भी उसे स्पष्ट रूप से समझ में आ जाता है। वह कालिदास से मिलना चाहता है, लेकिन कालिदास उससे मिलने से बचता है। इस पर विलोम व्यंग्यपूर्वक कहता है कि क्या उसके मैले और फटे वस्त्रों के कारण उससे मिलना नहीं चाहते या फिर उससे ही घृणा हो गई है। वह यह भी स्पष्ट करता है कि उनका पुराना संबंध समाप्त नहीं हो सकता। लंबे समय का अंतराल होने के बावजूद उसने अपने संबंधों में दूरी नहीं आने दी। आज भी उनकी स्थिति वही है-पहले भी मुलाकात यहीं हुई थी और आज भी यहीं हो रही है। अपने कथन को और प्रभावशाली बनाते हुए वह मल्लिका से कहता है कि उसने अब तक अतिथि का सत्कार नहीं किया है, जबकि इतने लंबे समय बाद आए अतिथि का स्वागत किया जाना चाहिए। यहाँ वह पुरानी घटना से अपने कथन को जोड़ता है। जब कालिदास उसे वहाँ से चले जाने को कहता है, तो विलोम अचानक सत्ता और शासन की शक्ति का उल्लेख करता है और कहता है कि शासन अत्यंत शक्तिशाली होता है। इस प्रकार विलोम के दोनों पक्ष स्पष्ट हो जाते हैं-वह दूरदर्शी भी है और वाचाल भी।