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“अन्य लोगों को उससे क्या प्रयोजन है! परन्तु मुझे है। उसके प्रभाव से मेरा घर नष्ट हो रहा है।” अम्बिका की इस नाटक में भूमिका समझाते हुए उक्त कथन के आधार पर उसका चरित्र-चित्रण कीजिए। - Hindi (Indian Languages)

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प्रश्न

“अन्य लोगों को उससे क्या प्रयोजन है! परन्तु मुझे है। उसके प्रभाव से मेरा घर नष्ट हो रहा है।” अम्बिका की इस नाटक में भूमिका समझाते हुए उक्त कथन के आधार पर उसका चरित्र-चित्रण कीजिए।
सविस्तर उत्तर
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उत्तर

अम्बिका एक सरल, ग्रामीण वृद्ध महिला है, जो अपनी बेटी मल्लिका के साथ अपने घर में रहती है। घर-गृहस्थी के अधिकांश काम वह स्वयं संभालती है और मल्लिका भी उसके कार्यों में हाथ बँटाती है। ग्रामीण महिला होते हुए भी उसकी सोच ऊँची और परिपक्व है। वह हर परिस्थिति में अपनी बेटी का साथ देना चाहती है और उसका व्यक्तित्व मातृ-वात्सल्य से भरा हुआ है। भीगी हुई बालिका को उसने डाँटा नहीं; बल्कि उसे दूध पीकर आराम करने की सलाह दी।

अम्बिका अपनी बेटी के विवाह के लिए तैयार है, लेकिन मल्लिका अभी विवाह के लिए स्वयं को तैयार नहीं मानती। मल्लिका अपने जीवन को अपना अधिकार समझती है, जबकि अम्बिका का मानना है कि बेटी पर उसका भी कुछ अधिकार है, क्योंकि वह सामाजिक अपवादों और लोगों की बातों को सहन नहीं करना चाहती। बेटी “भावना से भावना का वरण” करने की बात कहती है, पर अम्बिका की दृष्टि में यह सब झूठ और केवल एक छलावा है। वह कहती है कि वह उसे अच्छी तरह जानती है और उससे घृणा करती है। उसे दूसरों की राय से विशेष मतलब नहीं, लेकिन उसे यह भरोसा है कि उसी के प्रभाव के कारण उसका घर बिगड़ रहा है।

इस प्रकार स्पष्ट होता है कि अम्बिका एक आदर्श गृहिणी और माँ है, जो सामाजिक आँधी के बीच भी अपनी बेटी को सुरक्षित रखना चाहती है।

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