मराठी

सत्य और संकल्प के अंतर्संबंध पर अपने विचार व्यक्त कीजिए। - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

सत्य और संकल्प के अंतर्संबंध पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

सत्य और संकल्प में भक्त और भगवान के समान संबंध है। जैसे भक्त के बिना भगवान और भगवान के बिना भक्त का कोई अस्तित्व नहीं होता, वैसे ही सत्य के मार्ग में बढ़ते हुए यदि मनुष्य में संकल्प शक्ति की कमी है, तो सत्य तुरंत दम तोड़ देता है। सत्य का मार्ग बहुत कठिन और संघर्ष युक्त है। सत्य का आचरण करना लोहे के चने चबाने के समान है। इस पर चलते हुए विरोधों तथा विरोधियों का सामना करना पड़ता है। लोगों की प्रताड़ना तथा उलाहनाओं को भी झेलना पड़ता है। आज के युग में लोग अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए अधर्म तथा अनीति का सहारा लेते हैं। ऐसे में सत्य के लिए कोई स्थान नहीं है क्योंकि अधर्म तथा अनीति में असत्य फलता-फूलता है। परन्तु जो लोग दृढ़ संकल्प होकर इस मार्ग में बढ़ते हैं, सत्य का परचम वहाँ सदैव लहराता रहता है। उनके रहते सत्य दिनोंदिन प्रगति करता हुआ अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करता है। अत: सत्य और संकल्प में घनिष्ट संबंध है।

shaalaa.com
सत्य
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?

संबंधित प्रश्‍न

सत्य क्या पुकारने से मिल सकता है? युधिष्ठिर विदुर को क्यों पुकार रहे हैं- महाभारत के प्रसंग से सत्य के अर्थ खोलें।


सत्य का दिखना और ओझल होना से कवि का क्या तात्पर्य है?


'युधिष्ठिर जैसा संकल्प' से क्या अभिप्राय है?


कविता में बार-बार प्रयुक्त 'हम' कौन है और उसकी चिंता क्या है?


सत्य की राह पर चल। अगर अपना भला चाहता है तो सच्चाई को पकड़।– इन पंक्तियों के प्रकाश में कविता का मर्म खोलिए।


आप सत्य को अपने अनुभव के आधार पर परिभाषित कीजिए।


'ईमानदारी और सत्य की राह आत्म सुख प्रदान करती है' इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।


गांधी जी की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' की कक्षा में चर्चा कीजिए।


'लगे रहो मुन्नाभाई' फ़िल्म पर चर्चा कीजिए।


कविता में आए महाभारत के कथा-प्रसंगों को जानिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×