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शिशु के धूल लगे शरीर को देखकर कवि को कैसा लगा?

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प्रश्न

शिशु के धूल लगे शरीर को देखकर कवि को कैसा लगा?

एका वाक्यात उत्तर
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उत्तर

शिशु को धूल-धूसरित शरीर कवि को मुग्ध कर गया। शिशु के ऐसे शरीर को देखकर कवि को लगा कि जैसे तालाब छोड़कर कमल उसकी झोंपड़ी में खिल गया हो और अपना रूप-सौंदर्य बिखेर रहा हो।

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यह दंतुरित मुसकान
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?

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भाव स्पष्ट कीजिए -

छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात।


भाव स्पष्ट कीजिए -

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छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात”

'तुम्हारी ये दंतुरित मुस्कान' से ली गई उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त बिम्ब को स्पष्ट कीजिए।


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पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -

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