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प्रश्न
“सच । मेरी बड़ी चिंता दूर हुई। इस बार भगवान् ने मेरी सुन ली। ज़रूर परसाद चढ़ाऊँगी रे!”
- उक्त पंक्तियों से सम्बन्धित पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए। (1)
- अम्मा इस समय किस से बात कर रही हैं तथा वे परसाद क्यों चढ़ाना चाहती हैं? (2)
- ‘इस बार भगवान ने मेरी सुन ली’ - इस बार ऐसा क्या हुआ था जो पिछली बार नहीं हो पाया था? (2)
- ‘आर्थिक तथा सामाजिक मजबूरियों के कारण दो पीढ़ियों को अलगाव का दर्द सहना पड़ता है।’ इस कथन की पुष्टि इस कहानी के आधार पर कीजिए। (5)
सविस्तर उत्तर
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उत्तर
- पाठ का शीर्षक मजदूरी है तथा इसके लेखक मन्नू भंडारी हैं।
- अम्मा ने औपचारालय में काम करने वाले एकमात्र नौकर शिब्बू से बातचीत की। शिब्बू ने बताया कि रमा ने बेद को सब कुछ समझा दिया है और वह बातों को अच्छी तरह समझ भी गया है। अब उसकी पड़ोस के बच्चों से मित्रता हो गई है और वह उनके साथ खूब खेलता है। बच्चों के बीच उसका मन लग गया है और वह सचमुच अम्मा को भूलने लगा है। यह सब जानकर अम्मा अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्होंने ईश्वर का धन्यवाद किया, यह मानते हुए कि भगवान ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली है। इसी कारण अम्मा भगवान से संतुष्ट हैं।
- इस बार भगवान ने अम्मा की प्रार्थना सुन ली और बेद बंबई में ही रमा के पास रम गया। प्रारंभ में वह अम्मा को भूल नहीं पा रहा था, चाहे कितना ही प्रयास किया जाए। अम्मा से दूर रहने के कारण उसने खाना-पीना छोड़ दिया था और लगातार रोता रहता था। इसी वजह से वह बीमार और बहुत कमजोर हो गया था।
- ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के बँटवारे के कारण खेती योग्य जमीन लगातार कम होती जा रही है, जिससे परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण जब ये परिवार रोज़गार की तलाश में महानगरों की ओर पलायन करते हैं, तो संयुक्त परिवार टूटने लगते हैं। इससे दो पीढ़ियों के बीच संबंधों में दरार आ जाती है और पारिवारिक मजदूरी में भी विघटन उत्पन्न होता है। इस अलगाव की पीड़ा पूरे समाज को सहनी पड़ती है, जैसा कि प्रस्तुत कहानी में माता-पिता और पुत्र, सास और पुत्रवधू, दादा-दादी और पोते के संबंधों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
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