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प्रश्न
।। सौर ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा ।।
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उत्तर
सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहा जाता है। सौर ऊर्जा ही मौसम एवं जलवायु में परिवर्तन करती है। यह धरती पर सभी प्रकार के जीवन का सहारा है। सौर ऊर्जा से बिजली पैदा की जाती है। इस बिजली से पानी गरम करना, पंखे चलाना आदि काम करते हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाले लालटेन और सौर कूकर का भी उपयोग तेजी से होने लगा है। सौर ऊर्जा कभी न खत्म होने वाली अक्षय ऊर्जा है। जब तक सूर्य चमकता रहेगा, सौर ऊर्जा हमारे काम आएगी।
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अक्षर समूह में से वैज्ञानिकों के उचित नाम बताओ और लिखाे :
| मी | भा | हो | भा | - | ______ | ||
| नी | से | ज | भि | र | - | ______ | |
| मं | बं | जू | स | ल | - | ______ | |
| स्क | रा | र्य | भा | चा | - | ______ | |
| जे. | क | म | ला | ए. | पी. | - | ______ |
| जा | अ | न | म्म | की | ल | - | ______ |
| ना | व | क | ला | चा | ल्प | - | ______ |
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
