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"सार्वजनिक काम राजा की मर्ज़ी के मोहताज़ नहीं होते, उसे खुद हमेशा इनके लिए तैयार रहना चाहिए।" ऐसे कौन-कौन से सार्वजनिक कार्य हैं जिन्हें आप बिना किसी हिचकिचाहट के करने को तैयार हो जाते हैं?

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प्रश्न

"सार्वजनिक काम राजा की मर्ज़ी के मोहताज़ नहीं होते, उसे खुद हमेशा इनके लिए तैयार रहना चाहिए।" ऐसे कौन-कौन से सार्वजनिक कार्य हैं जिन्हें आप बिना किसी हिचकिचाहट के करने को तैयार हो जाते हैं?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

ऐसे कई काम हैं जो हम बिना सरकार के कर सकते हैं वो इस प्रकार हैं -

(1) किसी की मदद करने के लिए हमें सरकार की आवश्यकता की ज़रूरत नहीं होती फिर चाहे वह मनुष्य की हो या जानवर की इसे हम स्वयं कर सकते हैं।

(2) समाज में गरीब-बच्चों को पढ़ाने के लिए हमें सरकार का मुँह ताँकने की आवश्यकता नहीं है। हम चाहे तो थोड़ा सा समय निकालकर उनको पढ़ाई के लिए प्रेरित कर उनमें शिक्षा का प्रसार कर सकते हैं।

(3) सरकार के रवैये के प्रति सजगता- यदि हमें लगे कि हमने जो सरकार चुनी हैं वह सही तौर पर जनता के विकास के कार्यों को नहीं कर रही है तो हम इसके विरूद्ध आवाज़ उठा सकते हैं और एक नई सरकार बना सकते हैं चाणक्य ने भी लिखा है कि यदि कोई राजा अनीति करता है तो उसकी प्रजा को यह अधिकार है कि उसे हराकर किसी दूसरे को उसकी जगह बैठा दें। यह हमारा अधिकार व कर्तव्य है।

(4) महिलाओं की दशा सुधारने का कार्य- ये ऐसा कार्य है जिसे समाज का हर व्यक्ति कर सकता है। यदि राजा राम मोहन राय जैसे लोग सती प्रथा व पुन: विधवा विवाह के लिए कदम नहीं उठाते तो आज समाज में स्त्रियों की दशा नहीं सुधरती। हमें चाहिए स्त्रियों की शिक्षा व अधिकार सम्बन्धी कार्यों के लिए हम स्वयं कुछ करें।

(5) अपने देश, राज्य या मोहल्ले को स्वच्छ व सुंदर बनाए रखने के लिए हम साथ कार्य कर सकते हैं। जगह-जगह वृक्षों का रोपण कर सकते हैं, गली-मोहल्ले की सफ़ाई की व्यवस्था के लिए स्वयं कार्यरत हो सकते हैं। हमारे सहयोग से ही देश को स्वच्छ व सुंदर बनाया जा सकता है। इसमें सरकार के द्वारा कदम उठाने का इंतज़ार करना हमारा, हमारे देश के लिए कर्त्तव्यों की तरफ़ से आँख मूँदना होगा।

(6) किसी अकस्मात् दुर्घटना पर मिलजुलकर हाथ बँटाना हमारा कर्त्तव्य है, ये कर्त्तव्य बिना किसी परेशानी के किया जा सकता है, जैसे- दुर्घटना स्थल पर घायलों की मदद करना, उनके लिए उपचार सम्बन्धी साधनों को जुटाना आदि। इसका सबसे बड़ा उदाहरण भुज में हुए भूकंप के समय देखा गया था जब हम सबने मिलकर भुज के लिए अन्न, कपड़ें, दवाईयों हेतु कार्य किए। इसके लिए सरकार का मुँह देखने की हमें आवश्यकता नहीं पड़ी।

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गद्य (Prose) (Class 8)
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पाठ 1: अहमदनगर का किला - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ १२८]

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एनसीईआरटी Hindi Bharat Ki Khoj Class 8
पाठ 1 अहमदनगर का किला
प्रश्न अभ्यास | Q 15 | पृष्ठ १२८

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