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'रंग गई क्षणभर, ढलते सूरज की आग से' - पंक्ति के आधार पर बूँद के क्षणभर रंगने की सार्थकता बताइए।

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प्रश्न

'रंग गई क्षणभर, ढलते सूरज की आग से' - पंक्ति के आधार पर बूँद के क्षणभर रंगने की सार्थकता बताइए।

टीपा लिहा
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उत्तर

पानी की बूँद समुद्र से ऊपर छँलाग मारती है। वह क्षणभर के लिए समुद्र से अलग हो जाती है, उस समय उस पर अस्त होते सूर्य की किरणें पड़ती हैं। उसके कारण वह सोने के समान रंग वाली हो जाती है। वह सोने के रंग में क्षणभर के लिए चमकती है मगर उस थोड़े समय में वह अपना महत्व दर्शा जाती है अर्थात अपनी सार्थकता बता जाती है। 

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मैंने देखा, एक बूँद
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पाठ 1.03: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १९]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 1.03 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ १९
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