मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (मराठी माध्यम) इयत्ता ९ वी

रेखांकित शब्‍द के विलोम शब्‍द लिखकर नए वाक्य बनाइए। हमें सदैव अपने लिए किए गए कामों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए ।

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प्रश्न

रेखांकित शब्‍द के विलोम शब्‍द लिखकर नए वाक्य बनाइए।

हमें सदैव अपने लिए किए गए कामों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए ।

टीपा लिहा
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उत्तर

कृतज्ञ × कृतघ्न

वाक्य:

कृतघ्न मित्र की मित्रता से शत्रु की शत्रुता अच्छी है।

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व्याकरण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.2: झुमका - स्वाध्याय [पृष्ठ ६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi (Composite) Lokvani Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 1.2 झुमका
स्वाध्याय | Q ५. | पृष्ठ ६

संबंधित प्रश्‍न

निम्‍न विरमचिन्ह का नाम लिखकर उनका वाक्‍य में प्रयोग करो:

‘‘ ’’


निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो

आत्‍मा


निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो 

तार


निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो 

नाखून


वाक्‍य शुद्ध करके लिखो :

तुम्‍हारे दाने कहा है


पाठ में प्रयुक्‍त उद्‌धरण, सुवचन, मुहावरे, कहावतें, आलंकारिक शब्‍द आदि की सूची बनाकर अपने लेखन प्रयोग हेतु संकलन करो।


निम्‍न शब्‍द के पर्यायवाची शब्‍द लिखिए:


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

मोह-ममता उन्हें अपने मार्ग से विचलित नहीं कर सकती थी। 


निम्न वाक्‍य में कारक रेखांकित कर उनके नाम और चिह्न लिखकर पाठ से अन्य वाक्‍य खोजकर लिखिए:

यहाँ भी लोगों ने रहने के लिए घर बना रखे हैं।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

कश्मीर में कई दर्शनीय स्थल देखने योग्य है।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

उसने प्राण की बाजी लगा दी।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो :

जलाशय चॉंदी की भाँति चमचमा रहा था।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो और मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :

अरेरे! पेड़ गिर पड़ा।


दिए गए शब्द कार्ड देखो पढ़ो और उनकी सहायता से सरल, मिश्र तथा संयुक्त वाक्य बनाकर कक्षा में सुनाओ। ( एक शब्द कार्ड का प्रयोग अनेक बार कर सकते हैं।)

रहा       घर       यह       सड़क       पानी       और
                     
राष्ट्रीय   बाईं   उदाहरण   का   बरसना   के
                     
ओर   वहीं   दाईं   भारत   जी   है
                     
एकात्मता   हैं   कुआँ   उत्तम   देश   की

निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द इस कहानी से ढूँढकर बताओ।


निम्न विशेषण शब्द का अपने वाक्य में प्रयोग करके उनका प्रकार लिखो।


अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

अनेक व्यक्तियों ने प्रदर्शनी देखी।


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

दृश्य ३ रानी सिंहासन पर बैठी थी सेवक का प्रवेश


निम्न शब्द के तीन पर्यायवाची शब्‍द रिक्‍त स्‍थान में लिखिए:-

शब्द पर्यायवाची शब्द
अन्य भिन्न      

उचित विरामचिह्न लगाइए:-

सूर्य अस्त हुआ आकाश लाल हुआ वराह पोखरों से उठकर घूमने लगे हिरन हरियाली पर सोने लगे और जंगल में धीरे धीरे अँधेरा फैलने लगा


शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह  शब्द  विलोम
+ अनुज ×

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
ब्रह्मर्षि
______ + ______  

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
सन्मति ______ + ______  

कोई, इस सर्वनाम का उपयोग करके अर्थपूर्ण वाक्‍य तैयार कीजिए।


परिच्छेद में आए सर्वनामों की सूची तैयार कीजिए।

           भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्‍ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्‍ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा।

           काठमांडू से एवरेस्‍ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्‍ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्‍था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्‍द हमने १९००० फीट पर स्‍थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्‍ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्‍था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्‍ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया।


कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।

उपर्युक्‍त अंश से पंद्रह शब्‍द ढूँढ़िए उनमें प्रत्‍यय लगाकर शब्‍दों को पुनः लिखिए।


रेखांकित शब्‍द के विलोम शब्‍द लिखकर नए वाक्य बनाइए।

साेच समझकर व्यय करना चाहिए ।


रिक्त स्थान की पूर्ति अव्यय शब्‍द से कीजिए और नया वाक्‍य बनाइए:

जहाँ एक लड़का ______ देख रहा था।


रिक्त स्थान की पूर्ति अव्यय शब्‍द से कीजिए और नया वाक्‍य बनाइए:

______ ! क्या बात।



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