मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (मराठी माध्यम) इयत्ता ९ वी

रेखांकित शब्‍द के विलोम शब्‍द लिखकर नए वाक्य बनाइए। बड़ी मुश्किल से उसकी आँख लगी ।

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प्रश्न

रेखांकित शब्‍द के विलोम शब्‍द लिखकर नए वाक्य बनाइए।

बड़ी मुश्किल से उसकी आँख लगी ।

टीपा लिहा
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उत्तर

मुश्किल × आसान

वाक्य:

सलिल को हर काम बहुत आसान लगता है।

shaalaa.com
व्याकरण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.2: झुमका - स्वाध्याय [पृष्ठ ६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi (Composite) Lokvani Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 1.2 झुमका
स्वाध्याय | Q २. | पृष्ठ ६

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निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो

दही


निम्‍नलिखित शब्द के आधार पर मुहावरे लिखकर उनका अपने वाक्‍य में प्रयोग करो।

ईंट


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केवल एक ही प्रतिद्‌वंद्‌वी जानता है, तुलसीदास।


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

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श्रीमती भटनागर ने दरवाजे पर फिर से वैसे ही गाड़ी के पहियों के निशान देखे।


प्रेरणार्थक क्रिया का रूप पहचानकर उसका वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:

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सहायक क्रिया का वाक्‍य में प्रयोग कीजिए।

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निम्नलिखित शब्द का वचन बदलकर वाक्य में प्रयोग करके लिखो:

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निम्नलिखित शब्दों के लिंग बदलो और वाक्य बनाकर लिखो: 

१. चाचा जी प्रकल्प में मेरा मार्गदर्शन करते हैं।

५. ______________________________ 

२. ______________________________

६. ______________________________
३. ______________________________ ७. ______________________________

४. ______________________________

८. ______________________________

दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

__________________

__________________


उचित विराम चिह्न लगाओ:

                                    घर
किसी दिन हम भी आपके आएँगे।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो और मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :

अरे! हम कहॉं आ गए ?


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो और मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :

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(आधे हाेकर, पाई हटाकर, हल लगाकर, ‘र’ के प्रकार )

(क, फ, ग, त, थ, घ, ष, व, द, म, ह, ठ, ड, ट, प, र)


निम्न विशेषण शब्द का अपने वाक्य में प्रयोग करके उनका प्रकार लिखो।


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

पराधीन को स्‍वप्न में भी सुख नहीं मिलता


निम्‍न वाक्‍य के उद्देश्य और विधेय पहचानकर लिखिए:-

गायन में अलाप और तानों का महत्‍त्‍व होता है।


निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
______ दंत + ओष्ठ  

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
दुश्चक्र ______ + ______  

कोई, इस सर्वनाम का उपयोग करके अर्थपूर्ण वाक्‍य तैयार कीजिए।


पाठ (गोदान) में प्रयुक्‍त मुहावरे ढूँढ़कर उनका अर्थ लिखिए तथा वाक्‍य में प्रयोग कीजिए।


इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्‍सम, तद्भव शब्‍द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्‍द ढूँढ़िए।

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

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रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

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रिक्त स्थान की पूर्ति अव्यय शब्‍द से कीजिए और नया वाक्‍य बनाइए:

______ ! क्या बात।


निम्‍नलिखित मुहावरा, कहावत में गलत शब्‍द के स्‍थान पर सही शब्‍द लिखकर उन्हें पुनः लिखिए:

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निम्नलिखित मुहावरे के सही अर्थ का चयन कीजिए।

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