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प्रश्न
प्रतापनारायण मिश्र का निबंध ‘बात’ और नागार्जुन की कविता ‘बातें’ ढूँढ़ कर पढ़ें।
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उत्तर
यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है, इसलिए दोनों रचनाओं का संक्षिप्त परिचय और मुख्य भाव नीचे समझाया है, ताकि आप उन्हें आसानी से पहचानकर पढ़ सकें।
प्रतापनारायण मिश्र का निबंध - “बात”
इस निबंध में लेखक ने “बात” यानी भाषा और कथन के महत्व पर विचार किया है। वे बताते हैं कि बात केवल शब्दों का समूह नहीं होती, बल्कि उसका सही अर्थ और प्रभाव भी जरूरी होता है। लेखक यह भी समझाते हैं कि गलत, अनावश्यक या आडंबरपूर्ण भाषा से मूल बात का अर्थ बिगड़ जाता है। सरल और स्पष्ट भाषा को ही श्रेष्ठ माना गया है।
नागार्जुन की कविता - “बातें”
इस कविता में नागार्जुन ने आम जीवन की छोटी-छोटी बातों के महत्व को दिखाया है। वे यह बताते हैं कि बातें केवल शब्द नहीं होतीं, बल्कि वे समाज, जीवन और अनुभवों को जोड़ने का माध्यम होती हैं। उनकी कविता में सरल भाषा में गहरे सामाजिक और मानवीय भाव व्यक्त होते हैं।
Notes
छात्रों को यह गतिविधि खुद करनी होगी।
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व्याख्या करें
ज़ोर ज़बरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी।
आधुनिक युग में कविता की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए।
चूड़ी, कील, पेंच आदि मूर्त्त उपमानों के माध्यम से कवि ने कथ्य की अमूर्त्तता को साकार किया है। भाषा को समृद्ध एवं संप्रेषणीय बनाने में, बिंबों और उपमानों के महत्त्व पर परिसंवाद आयोजित करें।
सुंदर है सुमन, विहग सुंदर
मानव तुम सबसे सुंदरतम।
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
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