Advertisements
Advertisements
प्रश्न
पृथक्करणं कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित-विशेषणम् |
(मञ्जूषा - याचते, श्रवणीयम्, प्रदत्तवान्, शिक्षयाति)
Advertisements
उत्तर
| क्रियापदम् | धातुसाधित-विशेषणम् |
| याचते | श्रवणीयम् |
| शिक्षयाति | प्रदत्तवान् |
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
सर्वं व्याप्नोति सलिलं शर्करा लवणं यथा।
एवं मानवताधर्मो धर्मान् व्याप्नोति सर्वथा।।
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
सकला नद्यः कं प्रविशन्ति?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
सङ्गीते स्वराः कीदृशाः?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
कः सर्वधर्मान् व्याप्नोति?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
भानुः कं प्रकाशयति?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
कां भज इति कविः वदति?
सन्धिविग्रहं कुरुत।
भानुर्भुवनमण्डलम् = ...... + भुवनमण्डलम्।
सन्धिविग्रहं कुरुत।
व्यवहरेल्लोके = ..... + लोके।
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
त्वं सर्वधर्मान् परित्यज्य मानवतां भज ।
(‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
सर्वे धर्माः मानवतागुणं शंसन्ति ।
(कर्मवाच्ये परिवर्तयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
भानुः भुवनमण्डलं प्रकाशयति ।
(णिजन्तं निष्कासयत ।)
समानार्थकशब्दमेलनं कुरुत।
| (१) | सरित् | (अ) | वर्णः |
| (२) | रङ्गः | (आ) | भानुः |
| (३) | अम्भः | (इ) | नदी |
| (४) | दिनकृत् | (ई) | पन्थाः |
| (५) | मार्गः | (उ) | सलिलम् |
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
मानवताधर्मः अभ्युदयकृत् कथं वर्तते?
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
सर्वे धर्माः मानवताधर्म समाश्रिताः इति सोदाहरणं स्पष्टीकुरुत।
जालरेखाचित्रं पूरयत।

नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ऋत्विग्भ्याम् | ______ | तृतीय |
पृथक्करणं कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
(मञ्जूषा - मम, राजा, एतौ, साधवः)
पृथक्करणं कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
(मञ्जूषा - शाखी, वयम्, पिता, ताः)
पृथक्करणं कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
(मञ्जृषा - कस्मै, यया, रथैः तीरे)
पृथक्करणं कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
(मञ्जूषा - मनसा, अस्याः, प्राणान्, अयम्)
पृथक्करणं कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
(मज्जूषा - इमानि, शब्देषु, एतया, बाल्ये)
पृथक्करणं कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित-विशेषणम् |
(मञ्जूषा - त्यजतु, हतः, अब्रूत, पीतः)
पृथक्करणं कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित-विशेषणम् |
(मञ्जूषा - भेतव्यम्, जानाति, ददाति, मुक्तः)
पृथक्करणं कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित-विशेषणम् |
(मञ्जूषा - क्रुद्धः, अददात्, प्रजायते, दृश्यम्)
पृथक्करणं कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित-विशेषणम् |
(मज्जूषा - रमणीयम्, श्रयेत्, प्राप्ता, भुङ्क्ते)
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| दिशि | ______ | ______ | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | श्रेष्ठिनौ | ______ | प्रथमा |
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
षड्जमूला यथा सर्वे सङ्गीते विविधाः स्वराः।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्माः समाश्रिताः।।
माघ्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
यथैव सकला नद्य: प्रविशन्ति महोदधिम्।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्मा: समाश्रिताः॥
